Rajasthan Panchayat: राजस्थान में ग्राम पंचायतों को मजबूत करने के लिए सरकार ने फंड और सरपंचों के अधिकार बढ़ाए हैं. 15वें वित्त आयोग व राज्य योजनाओं से विकास राशि मिलती है. अप्रैल 2025 से सरपंचों का मानदेय बढ़ाकर 6,072 रुपये किया गया है.
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Rajasthan Panchayat Chunav
राजस्थान में गांवों की व्यवस्था को और सशक्त बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार कदम उठा रही है. इसी दिशा में ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए सरपंचों को आर्थिक मदद के साथ-साथ ज्यादा अधिकार भी दिए गए हैं. इन अधिकारों की मदद से गांवों में सड़क, पेयजल, नाली, पंचायत भवन और दूसरी बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम तेजी से पूरे किए जा सकें, इस पर खास जोर दिया जा रहा है.
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ग्राम पंचायतों को विकास कार्यों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाओं से धन मिलता है. इनमें 15वें वित्त आयोग की भूमिका सबसे अहम मानी जाती है. इसके तहत हर पंचायत को अलग-अलग जरूरतों के अनुसार राशि दी जाती है. जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार की ओर से प्रति पंचायत करीब 17 लाख रुपये और राज्य सरकार की तरफ से लगभग 3.25 लाख रुपये का अनुदान दिया गया है, जिससे गांवों में विकास के काम आगे बढ़े हैं.
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इसके अलावा राज्य वित्त आयोग के माध्यम से भी पंचायतों को अनुदान मिलता है. हालांकि कई बार इस राशि के जारी होने में देरी हो जाती है, जिससे विकास कार्य प्रभावित होते हैं. पंचायतों को मिलने वाला कुल फंड गांव की आबादी, क्षेत्रफल और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर तय किया जाता है. इतना ही नहीं, किसी भी राशि के खर्च से पहले ग्राम सभा की स्वीकृति लेना अनिवार्य होता है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे.
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सरकार ने सरपंचों के अधिकारों में भी बड़े बदलाव किए हैं. नए नियमों के तहत अब सरपंच 10 लाख रुपये तक के विकास कार्यों को स्वयं मंजूरी दे सकते हैं. पहले इन कामों के लिए प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था. अब अंतिम वित्तीय स्वीकृति सरपंच स्तर पर ही दी जा सकती है, जिससे छोटे लेकिन जरूरी कामों में होने वाली देरी काफी हद तक कम हुई है.
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पहले ये अधिकार खंड विकास अधिकारी यानी बीडीओ के पास होते थे. इस वजह से सरपंचों को हर काम के लिए बीडीओ कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे. अब बीडीओ के अधिकार भी बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक कर दिए गए हैं, जबकि सरपंचों को इससे दोगुनी सीमा तक अधिकार दिए गए हैं. इससे पंचायत स्तर पर फैसले लेना पहले के मुकाबले आसान हो गया है.
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जानकारी के अनुसार राजस्थान में सरपंचों को दो तरह से सहयोग दिया जा रहा है. एक ओर विकास कार्यों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से फंड मिलता है, वहीं दूसरी ओर अधिकारों का दायरा बढ़ाकर उन्हें ज्यादा जिम्मेदारी सौंपी गई है. इन संसाधनों के सहारे सरपंच गांव के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि बताई गई राशियां समय और योजना के अनुसार बदल भी सकती हैं.
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अब बात करें सरपंचों को मिलने वाली सैलरी की, तो इसमें भी हाल ही में बढ़ोतरी की गई है. अप्रैल 2025 से राजस्थान के सरपंचों को मासिक मानदेय के रूप में 6,072 रुपये दिए जा रहे हैं. इससे पहले उन्हें 5,520 रुपये प्रति माह मिलते थे. लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग उठ रही थी, जिसे सरकार ने आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए यह बढ़ोतरी लागू की है.