Diwali 2025: दिवाली की रात को भारत के कई राज्यों में एक खास सब्जी बनाई और खाई जाती है. ये परंपरा काफी सालों से चलती आ रही है. ये सब्जी खासकर उत्तर भारत, बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बनती है.
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सूरन (जिमीकंद) की सब्जी दिवाली पर विशेष रूप से कई जगहों पर बनाई जाती है. खासकर उत्तर भारत, बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में. इसके पीछे धार्मिक और पारंपरिक रिवाज है.
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कहते हैं कि दिवाली अमावस्या (अंधकार की रात) को आती है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन तामसिक शक्तियां (नकारात्मक ऊर्जा) सक्रिय होती हैं.
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सूरन एक ऐसा कंद है, जो पृथ्वी के अंदर उगता है और इसे पवित्र और तामसिकता को नष्ट करने वाला माना जाता है. इसे खाने से शुद्धता और सकारात्मकता बढ़ती है, ऐसा धार्मिक विश्वास है.
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सूरन को 'वज्रकंद' भी कहा जाता है. यह मजबूत और कठोर होता है, और इसे खाने से माना जाता है कि शरीर और मन को भी ऐसी ही मजबूती मिलती है.
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दिवाली के बाद ठंड का मौसम शुरू होता है, सूरन को खाने से शरीर को गर्मी मिलती है, जिससे सर्दी-खांसी से बचाव होता है.
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दिवाली के समय घरों में भारी पकवान बनते हैं. सूरन की सब्जी पचने में हल्की होती है और पाचन को दुरुस्त रखती है.
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सूरन मिट्टी के नीचे उगता है, पर फिर भी पोषक और उपयोगी होता है यह 'अंदर की अच्छाई' का प्रतीक माना जाता है. सूरन का सेवन इस बात को दर्शाता है कि भीतर की अच्छाइयों को अपनाना चाहिए, चाहे वे छुपी हुई क्यों न हों. (डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.)