कौन थी मेवाड़ की हाड़ी रानी? जिन्होंने अपने पति के लिए काटकर हाथ में रख दिया था सिर

Published: Sep 18, 2025, 04:43 PM|Updated: Sep 18, 2025, 04:43 PM

Hadi Rani: 16वीं सदी में राव रतन सिंह की पत्नी हाड़ी रानी ने देश रक्षा को पति के प्रेम से ऊपर रखा. युद्ध में पति का ध्यान भंग न हो, इसलिए उन्होंने अपना सिर काटकर भेज दिया. इस बलिदान से रतन सिंह ने पूरी शक्ति से लड़ाई लड़ी और विजय पाई.

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इतिहास की पृष्ठभूमि

यह घटना 16वीं सदी की है. मेवाड़ के राजा राज सिंह के सामंत थे राव चुंडावत रतन सिंह. रतन सिंह का विवाह हाड़ा राजपूत की सुंदर युवती सलेह कंवर से हुआ, जिसे प्यार से हाड़ी रानी कहा जाता था.
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राजा-रानी का बंधन

रानी हाड़ी और राजा रतन सिंह के बीच गहरी मोहब्बत थी. राजा जब युद्ध हेतु निकलने की तैयारी करने लगे, तो रानी ने पुरा होसला दिखाया. राजा चाहते थे कि रानी साथ रहे, लेकिन युद्ध की जिम्मेदारी ने उन्हें अलग कर दिया.
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विपदा के समय की बेचैनी

युद्ध के समय राजा का मन न रानी से लौटने में लगा था. एक सैनिक द्वारा भेजे गए संदेश के माध्यम से रानी और राजा एक-दूसरे की चिंता महसूस कर रहे थे.
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अंतिम बलिदान

रानी ने महसूस किया कि राजा की फोकस युद्ध और देश की रक्षा पर होना चाहिए, न कि उसकी ओर. इस लिए उन्होंने संदेश के साथ अपनी अंतिम निशानी भेजी. जिसमें उन्होंने अपने हाथों खुद अपना सिर काट कर सैनिकों के माध्यम से राजा के पास भेजा.
परिणाम और प्रभाव5/7

परिणाम और प्रभाव

रानी की ये बलिदानी करुणा देखकर राजा भावुक हो गए. उन्होंने पूरी ताकत से युद्ध लड़ा और विजयी हुए. इस घटना ने राजस्थान में वीरता, वतनभक्ति और नारी शक्ति का प्रतीक बन गई. आज भी हाड़ी रानी की कहानी नए जमाने के लिए प्रेरणा है.
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शिक्षा और प्रेरणा

हाड़ी रानी का बलिदान बताता है कि सच्चा प्रेम सिर्फ निजी इच्छाओं का बंधन नहीं, बल्कि राष्ट्र और धर्म की सेवा भी हो सकता है. युद्ध-भय, दूरी और समय की कठिनाइयों को उन्होंने अपनी हिम्मत से मात दी.
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Disclaimer

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