Mughal: मुगल बादशाह हुमायूं ने दरबार में पर्दा दरबार की शुरुआत की थी. वह पर्दे के पीछे से दरबारियों से बात करता था. इसका कारण सुरक्षा और गोपनीयता बताया जाता है. अकबर ने बाद में इस प्रथा को समाप्त कर झरोखा दर्शन शुरू किया, जिससे जनता से सीधा संवाद हो सका.
1/7
Mughal
मुगल इतिहास में कई रोचक परंपराएं दर्ज हैं. इनमें से एक पर्दा दरबार है, जिसकी शुरुआत सम्राट हुमायूं ने की थी. यह परंपरा शाही जीवनशैली और प्रशासनिक कामकाज का अनोखा हिस्सा मानी जाती है.
2/7
Mughal
हुमायूं ने दरबार में पर्दे का इस्तेमाल इसलिए किया ताकि बादशाह और प्रशासन के बीच एक परत बनी रहे. दरबार में आने वाले लोग बादशाह को सीधे न देख सकें और वह पर्दे के पीछे से ही उनसे बात करें. इसे ही पर्दा दरबार कहा गया.
3/7
Mughal
इतिहासकारों के अनुसार, हुमायूं ने यह व्यवस्था मुख्य रूप से सुरक्षा कारणों से शुरू की थी. पर्दे की वजह से किसी को बादशाह तक सीधी पहुंच नहीं मिल पाती थी. इससे शाही सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होती थी.
4/7
Mughal
दूसरा कारण था गोपनीयता. पर्दे के पीछे बैठकर हुमायूं केवल चुनिंदा लोगों से ही संवाद करते थे. इससे प्रशासनिक निर्णय लेने में गोपनीयता बनी रहती थी और हर जानकारी दरबार में सार्वजनिक नहीं हो पाती थी.
5/7
Mughal
यह परंपरा कुछ समय तक चली और हुमायूं के उत्तराधिकारी अकबर ने भी शुरूआती दिनों में इसे अपनाया. हालांकि, बाद में अकबर ने पर्दा दरबार की प्रथा को समाप्त कर दिया. अकबर का मानना था कि बादशाह और जनता के बीच दूरी नहीं होनी चाहिए.
6/7
Mughal
अकबर ने पर्दा दरबार की जगह झरोखा दर्शन जैसी प्रथा को अपनाया. इसमें बादशाह महल की बालकनी से बाहर आकर सीधे जनता को दर्शन देते और उनसे संवाद करते थे. इससे शासक और प्रजा के बीच सीधा संबंध स्थापित होता था.
7/7
Mughal
प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. Zee Rajasthan इसकी पुष्टि नहीं करता है.