Rajasthan Quiz: ये बात तो सबको पता है कि खाटू श्याम जी ने भगवान श्रीकृष्ण ने शीश का दान दिया था लेकिन ये बात बहुत कम लोगों को पता है कि उन्होंने अपने शीश का दान कहां दिया था.
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राजस्थान के सीकर जिले के खाटू कस्बे में बाबा श्याम का मंदिर हैं, जहां हर रोज भक्त दर्शन करने आते हैं. कहानियों के अनुसार, बाबा श्याम का असली नाम बर्बरीक है, जिनकी कहानी महाभारत काल से जुड़ी हुई है.
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khatu shyam ji
कहा जाता है बर्बरीक ने भगवान श्रीकृष्ण को हरियाणा के चुलकाना में शीश दान में दिया था. फिर भगवान कृष्ण ने उनके शीश को कुरुक्षेत्र से रूपावती नदी में बहा दिया, जो राजस्थान के खाटू गांव में पहुंचा था.
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Khatu Shyam ji ne sheesh ka daan kaha diya tha
बर्बरीक का शीश खाटू गांव में जमीन में दबा मिला था, जहां आज के समय में श्याम कुंड है. शीश मिलने के बाद वहां से शीश को निकाला गया और इसको मंदिर में स्थापित किया गया.
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Khatu Shyam ji story
कहते हैं कि खाटू श्याम का शीश जिस जगह पर मिला था, वहां हर रोज एक गाय दूध गिराती थी. इस स्थान पर खुदाई के दौरान शीश मिला, जिसे बाद में वर्तमान खाटू मंदिर में स्थापित किया गया.
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बर्बरीक से खुश होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि वे कलयुग में 'श्याम' के रूप में पूजे जाएंगे. कार्तिक माह की एकादशी तिथि को मंदिर में शीश स्थापित किया गया था.
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बर्बरीक ने जब अपना शीश दान किया था तो उनकी उम्र केवल 14 साल थी. वह घटोत्कच के बेटे थे. खाटू श्याम जी का कलियुग के देवता, शीश का दानी, हारे का सहारा आदि नामों से पुकारा जाता है. (डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.)