Mughal: भारत में मुगल शासन के इतिहास में औरंगजेब को गद्दी तक पहुंचाने में उसकी बहन रोशनआरा बेगम ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी. उसने पिता शाहजहां और भाई दारा शिकोह की योजनाओं की जानकारी औरंगजेब तक पहुंचाकर और उससे दारा शिकोह की मौत की मांग की थी.
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मुगल इतिहास में औरंगजेब का बादशाह बनना एक बेहद नाटकीय अध्याय माना जाता है. इस सारे संघर्ष में औरंगजोब की छोटी बहन रोशनआरा बेगम ने अपनी बड़ी भूमिका निभाई थी. इतिहासकारों के अनुसार उसने अपने भाई औरंगजेब को गद्दी तक पहुंचाने में हर संभव मदद की.
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दरअसल, शाहजहां के बीमार पड़ने के बाद उसके उत्तराधिकारी बनने की लड़ाई शुरू हुई थी. बड़े बेटे दारा शिकोह को शाहजहां का सबसे प्रिय माना जाता था और लोग उसे स्वाभाविक उत्तराधिकारी भी समझते थे. लेकिन इसी समय रोशनआरा ने अपना पक्ष औरंगजेब की ओर कर लिया था.
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माना जाता है कि रोशनआरा ने आगरा किले में बैठकर दारा शिकोह और शाहजहां के बीच हो रही सभी गुप्त योजनाओं की जानकारी चुपचाप औरंगजेब तक पहुंचाई थी. इससे औरंगजेब को रणनीति बनाने में आसानी मिली और दारा शिकोह की सारी चालें फेल हो गई थी.
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इतिहासकार ये भी बताते हैं कि जब औरंगजेब बादशाह बना था, तब भी दारा शिकोह उसके लिए खतरा बना रहा था. ऐसे में रोशनआरा ने अपने भाई को सुझाव दिया कि शिकोह को जीवित छोड़ना खतरनाक हो सकता है. माना जाता है कि इसी दबाव और राजनीतिक हालात के चलते दारा शिकोह को मौत की सजा दी गई.
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रोशनआरा की निष्ठा औरंगजेब के प्रति इतनी गहरी थी कि उसने पिता शाहजहां तक की भावनाओं की परवाह नहीं की. शाहजहां अपनी बेटी की इस चालाकी से बहुत ही आहत हुए. लेकिन कुर्सी की राजनीति में रोशनआरा ने साबित कर दिया थी कि उसके लिए सबसे महत्वपूर्ण औरंगजेब का बादशाह बनना था.
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इसी के चलते औरंगजेब के शासनकाल की शुरुआत से ही रोशनआरा को दरबार में काफी प्रभाव देखने को मिलता है. वह औरंगजेब की सबसे विश्वसनीय सहयोगी बनी और लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रही.
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