Rajasthan Quiz: कुंभलगढ़ किला, अरावली की ऊंचाई पर स्थित, राजस्थान की वीरता, स्थापत्य कला और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक है. महाराणा कुम्भा ने 15वीं सदी में बनवाया, 36 किमी लंबी दीवार और 360 मंदिर इसे अभेद्य और आकर्षक बनाते हैं.
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कुंभलगढ़ किला
राजस्थान के गौरवशाली इतिहास में यदि किसी किले को वीरता, अद्भुत वास्तुकला और प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक माना जाए, तो कुंभलगढ़ किला सबसे आगे आता है. अरावली की ऊंची पहाड़ियों पर बसा यह दुर्ग समुद्र तल से लगभग 1100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है.
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निर्माण
इस किले का निर्माण 15वीं सदी में महाराणा कुम्भा ने करवाया था. कहा जाता है कि कई बार निर्माण कार्य असफल रहा, तब एक साधु की सलाह पर मानव बलि दी गई. उसी स्थान पर आज भी ‘भौमिया जी मंदिर’ मौजूद है, जो इस घटना की याद दिलाता है.
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36 किलोमीटर लंबी है दीवार
कुंभलगढ़ की सबसे अनोखी पहचान इसकी 36 किलोमीटर लंबी दीवार है. यह दीवार चीन की दीवार के बाद दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार मानी जाती है. इतनी चौड़ी कि पांच घोड़े एक साथ दौड़ सकें. किले के भीतर सात विशाल दरवाजे और लगभग 360 मंदिर मौजूद हैं.
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महाराणा प्रताप का जन्म यहां हुआ था
यह किला सिर्फ स्थापत्य की दृष्टि से ही खास नहीं है, बल्कि यह राजपूती शौर्य और आत्मसम्मान का जीता-जागता प्रमाण भी है. राजस्थान के महान योद्धा महाराणा प्रताप का जन्म इसी किले में हुआ था. कठिन समय में मेवाड़ के शासकों ने यहीं शरण ली. इसकी भौगोलिक स्थिति इतनी सुदृढ़ थी कि दुश्मन कभी इसे जीत नहीं पाए, यही कारण है कि यह दुर्ग हमेशा अभेद्य रहा.
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सूर्यास्त का नजारा
कुंभलगढ़ से सूर्यास्त का नजारा किसी जादू से कम नहीं. ऊंचाई से दिखती अरावली की श्रृंखलाएं और ढलते सूरज की सुनहरी रोशनी इतिहास को मानो रंगों में ढाल देती है. आज कुंभलगढ़ केवल इतिहासकारों की रुचि का विषय नहीं है, बल्कि हर यात्री की भावनाओं से जुड़ा स्थान बन चुका है.
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संगीत का उत्सव
हर साल आयोजित होने वाला कुंभलगढ़ महोत्सव कला, संस्कृति और संगीत का उत्सव है, जो इसकी भव्यता को और बढ़ा देता है. इस किले की दीवारों से सटे खड़े होकर जब कोई चारों ओर का दृश्य देखता है, तो यही अहसास होता है कि कुंभलगढ़ सिर्फ पत्थरों का ढेर नहीं, बल्कि राजस्थान की आत्मा है. यह स्थल हर भारतीय के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है.