Mughal: अनारकली, असली नाम नादिरा बेगम, लाहौर की खूबसूरत नर्तकी थीं. शहजादे सलीम उनसे प्रेम करने लगे, जिसका अकबर ने विरोध किया. इस कारण सलीम ने विद्रोह किया. अनारकली का अंत रहस्य बना रहा, लेकिन उनकी प्रेम गाथा आज भी इतिहास और कला में अमर है.
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मुगल इतिहास की गहराइयों में झांकें तो कई किस्से सामने आते हैं, जिनमें से एक सबसे चर्चित कहानी अनारकली और शहजादे सलीम के प्रेम प्रसंग की है. यह कहानी सिर्फ दो दिलों का रिश्ता नहीं थी, बल्कि एक ऐसा संघर्ष थी जिसने दरबार से लेकर तख़्त तक हलचल मचा दी.
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अनारकली का असली नाम नादिरा बेगम या शरीफुन्निसा बताया जाता है. वह लाहौर की एक बेहद खूबसूरत नर्तकी थीं. अपनी सुंदरता और नृत्य कला के कारण वह मुगल हरम तक पहुंचीं और सम्राट अकबर के दरबार में दासी के तौर पर जानी गईं. उनका नाम ‘अनारकली’ इसलिए पड़ा क्योंकि उनकी खूबसूरती अनार के फूल की तरह खिली हुई मानी जाती थी.
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अनारकली के रूप और अदाओं ने शहजादे सलीम का दिल जीत लिया. दोनों के बीच एक गहरा प्रेम संबंध पनपा. लेकिन यह रिश्ता सामान्य नहीं था. यह मुगल दरबार का राजकुमार और एक नर्तकी का मिलन था, जिसे समाज और सत्ता दोनों की नजरों में स्वीकार्यता नहीं मिल सकती थी.
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जब इस प्रेम का पता सम्राट अकबर को चला, तो उन्होंने इसे सख्ती से नकार दिया. अकबर को लगता था कि एक दासी के साथ संबंध शाही गरिमा के खिलाफ है. यही विरोध आगे चलकर पिता-पुत्र के बीच गहरी खाई का कारण बना.
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अनारकली से मोहब्बत और पिता के विरोध ने शहजादे सलीम को विद्रोह के रास्ते पर ला खड़ा किया. इतिहासकारों के अनुसार, सलीम ने अकबर की सत्ता को चुनौती दी. यह विद्रोह मुगल साम्राज्य में हलचल मचाने वाला साबित हुआ. हालांकि अंत में सलीम को झुकना पड़ा, लेकिन अनारकली की किस्मत अलग ही मोड़ ले चुकी थी.
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अनारकली का अंत रहस्य से भरा हुआ है. कुछ मान्यताओं के अनुसार उन्हें दीवार में जिंदा चुनवा दिया गया, तो कुछ कहते हैं कि उन्हें गुपचुप रिहा कर दिया गया था. जो भी सच हो, लेकिन उनकी प्रेम गाथा अमर हो गई.
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