Mughal: मुगल बादशाहों की जिंदगी सिर्फ ताजमहल या फतहपुर सीकरी तक सीमित नहीं थी, बल्कि उनकी शादियां भी चर्चा में रहीं. बाबर से लेकर बहादुर शाह जफर तक कई पत्नियां रहीं. कुछ प्रेम से, कुछ राजनीति के लिए. हर शाही विवाह में सत्ता और रणनीति छिपी थी.
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मुगलों की रानियां
इतिहास में मुगल शासकों की निजी जिंदगी उतनी ही साहसिक और रोचक रही है जितनी उनकी लड़ाइयां और स्थापत्य कला. इन बादशाहों ने अक्सर एक से अधिक शादियां कीं—कुछ राजनीतिक गठबंधनों के लिए, कुछ व्यक्तिगत कारणों से. आइए, बाबर से लेकर बहादुर शाह जफर तक के बारे में बात करते हैं.
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बाबर (1526–1530)
मुगल वंश के संस्थापक बाबर ने लगभग आठ शादियां कीं और नौ बेटे तथा नौ बेटियां थीं उनकी रानियों में आयशा सुल्तान बेगम, जैनब सुल्तान बेगम, माहम बेगम, मसूमा सुल्तान बेगम, बीबी मुबारिका, गुलरुख बेगम, दिलदार बेगम, गुलनार, और नरगुल शामिल थीं.
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हुमायूं (1530–1540, 1555–1556)
उनकी पत्नियों की संख्या का सटीक पता मुश्किल है, लेकिन आठ प्रसिद्ध नामों का जिक्र मिलता है, जिनमें बेगा बेगम, हमीदा बानो बेगम (जहां तक जानकारी मिलती है, अकबर उनके पुत्र थे), माह चुचक बेगम, बीबी गनवार, खानिश आगा, मायवा जान, शाद बीबी और चांद बीबी शामिल थीं.
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अकबर (1556–1605)
अकबर अपने समय के प्रभावशाली शासकों में से एक थे. किसानी सहमति और राजनीतिक मजबूरियों के तहत उनकी कई शादियां हुईं. 'आइन-ए-अकबरी' में उनकी 11 प्रमुख रानियों का जिक्र मिलता है, जैसे रुकैया सुल्तान बेगम, सलीमा सुल्तान बेगम और आमेर की राजकुमारी जोधाबाई. हकीकत में 300 तक विवाह कथित हैं, लेकिन केवल 35 को ही अधिकार और प्रतिष्ठा मिली.
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जहांगीर (1605–1627)
उनकी लगभग 20 पत्नियां थीं, जिनमें नूरजहां सबसे प्रिय मानी जाती थीं. राजनीतिक रणनीति के लिए की गई कुछ विवाहों में मानबाई (जिन्हें शाह बेगम कहा गया) और जगत गोसाईं शामिल हैं—जगत गोसाईं शाहजहां की मां थीं.
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शाहजहां (1628–1658)
अपने शासनकाल में ताजमहल जैसी अद्वितीय स्थापत्य कृतियां बनाने वाले शाहजहां ने कई विवाह किए. मुमताज महल उनकी सबसे प्रिय रानी थीं, जिनके सम्मान में यह शानदार स्मारक बना. इसके अलावा उनका निकाह फारसी राजकुमारी कंधारी बेगम, इज्ज-उन-निसा बेगम (अकबराबादी महल), और मुती बेगम से हुआ था.
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औरंगजेब (1658–1707)
उन्हें एक कट्टर और धार्मिक दृष्टिकोण वाला शासक माना जाता है. उन्होंने दिलरस बानो (रबीआ-उद-दौरा) से विवाह किया, जो उनकी प्रिय रानी थीं. इसके बाद उनका निकाह नौवाब बाई (रहमत-अल-निसा) से हुआ था. लेकिन इसी दौरान ही हीरा बाई नामक दासी से उनका प्रेम हुआ, जिसकी मृत्यु ने उन्हें गहरे दुख में डाल दिया.
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बहादुर शाह जफर (1837–1857)
मुगल साम्राज्य के अंतिम बादशाह बहादुर शाह जफर की चार मूल पत्नियां थीं—जिनमें जीनत महल (उनकी पसंदीदा), अशरफ महल, ताज महल, और अकबरी महल शामिल हैं. इसके अलावा वे कई उप-पत्नियों के भी पति थे. माना जाता है कि केवल जीनत महल को उनके निर्वासन के समय संग ले जाया गया. बादशाह जफर को जब रंका (रंगून) निर्वासित किया गया, तो जीनत महल भी उनके साथ गईं और वहीं उनका अंतिम विश्राम हुआ.
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