Rajasthan Trending: जैसलमेर भारत की सबसे बड़ी पवन ऊर्जा परियोजना का केंद्र है, जहां 1064 मेगावाट की क्षमता वाला पवन पार्क संचालित है. यहां की हवाएं राज्य की 95% पवन ऊर्जा पैदा करती हैं. इसी के कारण जैसलमेर जिले को पवन नगरी के नाम से भी जाना जाता है.
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जैसलमेर
राजस्थान के रेगिस्तानी विस्तार में बसा जैसलमेर सिर्फ सोनार किले, हवेलियों और थार की रेत के लिए ही नहीं जाना जाता है. यह आज भारत की ऊर्जा क्रांति का भी गवाह है. यहां की हवाओं में सिर्फ संगीत नहीं, बिजली भी है. इसलिए तो जैसलमेर को गर्व से “पवन की नगरी” कहा जाता है.
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2001 में हुई थी शुरुआत
राजस्थान की पवन ऊर्जा यात्रा की शुरुआत यहीं से हुई. 2001 में जैसलमेर जिले के अमरसागर, बड़ाबाग, तेजुवा और सोड़ा माड़ा जैसे इलाकों में पवन चक्कियों की पहली श्रृंखला स्थापित की गई. इस प्रोजेक्ट को शुरू करने वाली कंपनी थी सुजलोन एनर्जी, जिसने इस क्षेत्र को ऊर्जा उत्पादन के नक्शे पर चमका दिया. शुरुआत में यह प्रयोग जैसा लगा, लेकिन आज यह 1064 मेगावाट की स्थापित क्षमता के साथ देश का सबसे बड़ा ऑनशोर पवन ऊर्जा पार्क बन चुका है.
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पवन चक्कियां
जब आप जैसलमेर की ओर यात्रा करते हैं, तो दूर-दूर तक फैली हुई विशाल पवन चक्कियां मानो आसमान से संवाद करती प्रतीत होती हैं. यह दृश्य न केवल अद्भुत है, बल्कि यह पर्यावरण की दिशा में उठाया गया एक मजबूत कदम भी दर्शाता है. यहां की हवा सिर्फ बालों को नहीं छूती, बल्कि लाखों घरों को रोशन करती है.
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राजस्थान की 95 फीसदी ऊर्जा होती है उत्पन्न
जैसलमेर की ये हवाएं राजस्थान की कुल पवन ऊर्जा का लगभग 95% हिस्सा अकेले पैदा करती हैं. ये संयंत्र, जो एक साथ हवा और सूरज दोनों की शक्ति से बिजली पैदा करते हैं, न सिर्फ भारत में, बल्कि दुनिया में सबसे बड़े हैं. 2022 से 2023 के बीच 390 मेगावाट से लेकर 700 मेगावाट तक की कई हाइब्रिड परियोजनाएं शुरू की गईं, जिसने जैसलमेर को वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया.
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रेगिस्तान का रत्न
सरकार की नीतियां, स्थिर भूमि, और भरपूर सूर्य व पवन संसाधनों की बदौलत जैसलमेर ऊर्जा क्षेत्र में “रेगिस्तान का रत्न” बन गया है. पवन ऊर्जा ने यहां के स्थानीय लोगों को रोजगार भी दिया है और पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता भी कम की है.
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हरित दिशा की और कदम
जैसलमेर सिर्फ हवा से बिजली नहीं बना रहा, वह भविष्य की एक हरित दिशा भी तय कर रहा है. जब देश भर में ऊर्जा संकट की चर्चा होती है, जैसलमेर अपनी चुप हवा से जवाब देता है — “मेरी हवा, मेरी शक्ति.” इस तरह, जैसलमेर सिर्फ इतिहास और विरासत की धरती नहीं, बल्कि भविष्य और संभावनाओं की भी भूमि है. यहां की हवा आज राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही है. यही तो है असली “पवन की नगरी” जहां ऊर्जा सिर्फ उत्पादन नहीं, एक प्रेरणा है.
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Disclaimer
प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. Zee Rajasthan इसकी पुष्टि नहीं करता है.