Rajasthan Rituals: राजस्थान के मारवाड़ की शादियों में कई तरह की रस्में निभाई जाती हैं. कहते हैं कि यहां की रस्मों में अफीम घुली हुई है. ग्रामीण इलाकों में आज भी ये रस्में निभाई जा रही हैं. ऐसे में आज हम आपको शादी की उस रस्म के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें मेहमानों को अफीम चटाई जाती है.
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राजस्थान के मेवाड़ में अफीम की खेती बहुत ज्यादा होती है, जहां इसका सेवन का प्रचलन भी है. यहां अफीम की दीवानगी बहुत ज्यादा है.
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मारवाड़ी इलाकों की शादी में एक प्रथा है निभाई जाती है, जहां शादी में मेहमानों को अफीम दी जाती है.
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मारवाड़ के जोधपुर, जैसलमेर और बाड़मेर के कुछ ग्रामीण इलाकों में अफीम मनुहार का मेवा माना जाता है. अफीम को कई नामों से जाना जाता है जैसे कालागर, नाग-झाग, कसनाग रा, काली, अमल, नागफैण, पोस्त, अफीण, कालागर आदि.
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यहां क इलाकों में लोग खूब अफीम का सेवन करते हैं. शादी, सगाई, शोक, मिलना-बिछड़ना हो, मान-मनुहार करनी हो, मेलजोल बढ़ाना हो या फिर आपसी समझौते के तहत झगड़ा ही खत्म करना हो, इसके लिए यहां पर अफीम की मनुहार की जाती है.
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वहीं, अफीम लेते समय ऐतिहासिक पुरुषों को याद किया जाता है, जिसे 'रंग देना' कहा जाता है. कहते हैं कि अब इलाके के गांव-गांव, ढाणी-ढाणी के लोगों के खून में अफीम है.
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अफीम का सेवन दो तरीके से किया जाता है, एक उसे सुखा कर, दूसरा गलाकर. कुछ लोग सीधा अफीम का दूध ही पी लेते हैं. वहीं, अफीम को गला कर ज्यादा खाया जाता है.
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डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.