Rajasthan News: राजस्थान में शुगर से पीड़ित लाखों मरीजों के लिए आज एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. अब ऊंटनी के दूध यानी कैमल मिल्क सीधे लोगों के घरों तक पहुंचाया जाएगा. सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माने जाने वाले इस दूध को लेकर सरस और उर्मूल ने मिलकर खास पहल शुरू की है.
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camel milk in rajasthan
राजस्थान में जहां ऊंट परंपरा और दैनिक जीवन का हिस्सा है. वहीं, अब कैमल मिल्क लोगों की सेहत का नया साथी बनने जा रहा है. डायबिटीज से जूझ रहे मरीजों के लिए इसे किसी वरदान से कम नहीं माना जाता. अब पहली बार इसे घर-घर पहुंचाने की शुरुआत हो चुकी है.
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सरस-उर्मूल द्वारा ऊंटपालकों से सीधे कैमल मिल्क खरीद रहे हैं और उपभोक्ताओं को मात्र 100 रुपये लीटर की दर से उपलब्ध करा रहे हैं. गांवों में ऊंट पालकों को इससे सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा जबकि शहरों में मरीजों को एक सेहतमंद विकल्प मिलेगा.
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वहीं, इसको लेकर सरस उर्मूल के प्रबंध निदेशक बीएल बिश्नोई ने जानकारी देते हुए कहा कि कैमल मिल्क कई बीमारियों के लिए रामबाण है. भारत और राज्य सरकार का उद्देश्य है कि इस दूध से पशुपालकों को सहारा मिले और उपभोक्ता को अच्छी दर पर कैमल मिल्क उपलब्ध हो. इसी दिशा में हमने बड़ा काम शुरू किया है. जल्द ही राजस्थान की पहली कैमल मिल्क कॉरपोरेट सोसाइटी भी बनने जा रही है.
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बीएल बिश्नोई कहा कि कि बज्जू क्षेत्र के ऊंटपालक इस पहल में तेजी से जुड़ रहे हैं. दूध की सप्लाई को एक जगह रोकने और नियमित उपलब्धता के लिए नई रूपरेखा तैयार की गई है. शुरुआत में जहां सिर्फ 10 लीटर दूध की सप्लाई हो रही थी. आज यह बढ़कर 50 लीटर तक पहुंच गई है.
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सरस ने 200 एमएल के छोटे पैक भी बूथों पर उपलब्ध करा दिए हैं ताकि लोग मॉर्निंग वॉक पर निकलते ही इसे आसानी से खरीद सकें अब धीरे–धीरे पूरे शहर में सप्लाई चेन को विस्तारित किया जा रहा है और सिर्फ दूध ही नहीं कैमल मिल्क से बने बिस्किट और कई अन्य हेल्थ प्रोडक्ट्स भी उर्मूल–सरस ने लॉन्च किए हैं.
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बता दें कि एशिया का एकमात्र इंटरनेशनल ऊंट अनुसंधान केंद्र भी बीकानेर में है, जहां सालों से कैमल मिल्क से जुड़े प्रोडक्ट्स पर काम होता रहा है लेकिन अब सरस की इस नई पहल से इसका विस्तार राज्य स्तर पर होने लगा है.
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सरकार की मंशा साफ है पशुपालक मजबूत हों, मरीज स्वस्थ हों, और कैमल मिल्क को वैश्विक पहचान मिले. बीकानेर से कैमल मिल्क की ये यात्रा शुरू हो चुकी है और जल्द ही इसका दायरा जयपुर सहित पूरे प्रदेश में नजर आएगा. कैमल मिल्क को लेकर यह पहल न सिर्फ स्वास्थ्य की दिशा में कदम है बल्कि ग्रामीण पशुपालकों के लिए भी उम्मीद की नई किरण साबित होगी ऐसी उम्मीद की जा रही है.