Banswara Devi Mandir: बांसवाड़ा-डूंगरपुर मार्ग पर स्थित त्रिपुरा सुंदरी मंदिर एक प्रसिद्ध मंदिर है, जो उमराई गांव के पास एक प्राचीन और महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है. यह मंदिर न केवल अपनी स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की दिव्य मूर्ति और इसके चमत्कारों के कारण भी भक्तों के बीच गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है.
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Banswara Tripura sundari Mandir
बांसवाड़ा का त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, सदियों पुराना एक प्राचीन शक्तिपीठ है, जिसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक है. मंदिर में काले पत्थर से बनी मां की एक अद्भुत और विशाल मूर्ति है. यह मंदिर राजस्थान की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है.
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Banswara Tripura sundari
यह मूर्ति सिंह पर सवार मां भगवती की 18 भुजाओं वाली है, जो दिव्य आयुध धारण किए हुए हैं. मंदिर के उत्तरी भाग में सम्राट कनिष्क के समय का एक शिवलिंग है, जो इसकी प्राचीनता को दर्शाता है.
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स्थानीय लोग मां को 'तरतई माता' और 'त्रिपुरा महालक्ष्मी' के नाम से भी पुकारते हैं. मंदिर के पास विक्रम संवत 1540 का एक शिलालेख मिला है, जो इसके इतिहास को और पुष्ट करता है.
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यह मंदिर भक्तों की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है, जहां मां की चमत्कारी शक्तियों पर लोगों का गहरा विश्वास है.चैत्र और अश्विन नवरात्रि के दौरान यहां हजारों की संख्या में भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं.
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यह मंदिर शक्ति पीठ के रूप में प्रसिद्ध है, जहां से भक्तों की गहरी आस्था जुड़ी है. मान्यता है कि यहां देवी की मूर्ति दिन में तीन बार अपना रूप बदलती है—सुबह में 'कुमारिका', दोपहर में 'यौवना' और शाम को 'प्रौढ़'.
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भक्तों का मानना है कि मां के तीनों रूपों के दर्शन करने से उन्हें अपार आशीर्वाद मिलता है और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
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अपनी भव्यता और चमत्कारों के कारण यह देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है.
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यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं Zee Rajasthan इसकी पुष्टि नहीं करता है.