Tilaswan Mahadev Temple: राजस्थान के बिजोलिया से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित तिलस्वां महादेव मंदिर शिव भक्तों की आस्था का एक प्रमुख केंद्र है. यह मंदिर परिसर अपनी प्राचीनता, अद्वितीय नक्काशी और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है. माना जाता है यहां पर स्थित कुंड में नहाने से चर्म रोगों से पीड़ित लोग ठीक हो जाते हैं..
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बिजोलिया का यह चमत्कारी मंदिर लगभग 10वीं या 11वीं सदी के आस-पास बना था. यह मंदिर मुख्य भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें स्थानीय रूप से तिलस्वां महादेव के नाम से जाना जाता है.
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हिन्दू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा के लिए शुभ माना गया. इस दिन श्रद्धालु भगवान शिव की विधि-विधान के पूजा करते हैं और मनोकामनाए मांगते हैं.
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परिसर में स्थित कुंड या जलाशय का भी विशेष धार्मिक महत्व है, जहां भक्त स्नान कर अपनी शुद्धि करते हैं.मान्यता है कि इस कुंड में नहाने से चर्म रोगों से पीड़ित लोग ठीक हो जाते हैं.
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हर साल महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर यहां एक विशाल मेला लगता है. इस दौरान दूर-दूर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और आशीर्वाद लेने आते हैं.
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यह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि चार प्राचीन मंदिरों का एक समूह है, जो इसे एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल बनाता है.मंदिर परिसर का शांत और प्रकृति से जुड़ा वातावरण भक्तों को एक गहरी आध्यात्मिक शांति का अनुभव कराता है.
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ऐसी मान्यता है कि तिलस्वां महादेव के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थनाएं और मांगी गई मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
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यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है. Zee Rajasthan इसकी पुष्टि नहीं करता है.