Radha Damodar mandir: जयपुर को छोटी काशी के रूप में जाना जाता है, जहां कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. गुलाबी नगरी में आराध्य देव गोविंद देव जी का विशेष स्थान है, लेकिन चौड़े रास्ते पर स्थित राधा दामोदर मंदिर का महत्व भी कम नहीं है. इस मंदिर की एक खास बात है, जो इसे बाकी मंदिरों से अलग बनाती है.
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Radha Damodar mandir
जयपुर को छोटी काशी के रूप में जाना जाता है, जहां कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. वहीं इस बार 16 अगस्त को कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है, जहां पर काफी धूमधाम होता है.
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krishna janmashtami 2025
राधा दामोदर मंदिर में पिछले 500 सालों से एक अद्भुत परंपरा चली आ रही है. जहां पूरे देश में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव आधी रात 12 बजे मनाया जाता है, वहीं इस मंदिर में यह उत्सव ठीक दोपहर 12 बजे मनाया जाता है. इसके पीछे एक बेहद प्यारा कारण है.
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मंदिर के महंत के अनुसार, दामोदर जी भगवान कृष्ण के नटखट बाल स्वरूप हैं. जैसे बच्चों को देर रात तक जगाया नहीं जाता, उसी तरह उनके बाल स्वरूप का अभिषेक और जन्मोत्सव भी दिन में ही मनाया जाता है. इसके बाद शाम तक नंदोत्सव मनाने के बाद मंदिर के कपाट रात 12 बजे से पहले ही बंद कर दिए जाते हैं.
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जन्माष्टमी के इस पावन अवसर पर मंदिर के महंत ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान का पंचामृत से अभिषेक किया और उनका विशेष साज-श्रृंगार किया.
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राधा दामोदर जी की मूर्ति का इतिहास भी बहुत पुराना है. यह मूर्ति वृंदावन से तत्कालीन महाराजा सवाई जयसिंह के आग्रह पर जयपुर लाकर स्थापित की गई थी.
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इसे लेकर यह भी कहा जाता है कि इसे श्री गोविंद विग्रह के प्राप्तकर्ता रूप गोस्वामी ने निर्मित किया था और बाद में अपने भतीजे जीव गोस्वामी को इसकी सेवा-पूजा के लिए सौंप दिया था. इस प्रकार, राधा दामोदर मंदिर की यह अनूठी परंपरा भक्तों को भगवान के बाल स्वरूप से जुड़ाव का एक अलग ही एहसास कराती है.
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यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं Zee Rajasthan इसकी पुष्टि नहीं करता हैं