Navratri 2025: नागौर का भंवाल माता मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. यहां देवी को ढाई प्याला शराब का भोग लगाया जाता है, जो कुछ ही क्षणों में गायब हो जाता है.नवरात्रि में लाखों भक्त यहां दर्शन के लिए आते हैं.
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Navratri 2025
इस बार शारदीय नवरात्रि 2025 की शुरुआत सोमवार, 22 सितंबर 2025 से होगी और इसका समापन बुधवार, 1 अक्टूबर 2025 को होगा. नवरात्रि 10 दिनों की होगी, क्योंकि तृतीया तिथि दो दिन (24 और 25 सितंबर) रहेगी. वहीं राजस्थान में एक ऐसा मंदिर है जहां देवी को प्रसाद में शराब चढ़ाई जाती है.
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भंवाल माता मंदिर
नागौर जिले के भंवाल गांव में स्थित भंवाल माता मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के कारण अन्य मंदिरों से बिल्कुल अलग है. इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां देवी को प्रसाद के रूप में ढाई प्याला शराब चढ़ाई जाती है, जबकि आमतौर पर अन्य मंदिरों में मीठे प्रसाद का ही भोग लगाया जाता है.
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ढाई प्याला शराब का भोग
इस मंदिर में माता को शराब का भोग लगाया जाता है, लेकिन यह प्रसाद केवल उन्हीं भक्तों द्वारा चढ़ाया जा सकता है जो सच्चे मन से आते हैं. पुजारी चांदी के प्याले में शराब भरकर देवी को अर्पित करते हैं और कुछ ही क्षणों में वह शराब गायब हो जाती है. यह प्रक्रिया तीन बार दोहराई जाती है, और तीसरी बार प्याला आधा भरा रह जाता है.
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आस्था की कसौटी
प्रसाद चढ़ाने से पहले भक्तों को एक कसौटी पर परखा जाता है. यदि किसी भक्त के पास बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू या चमड़े का सामान (बेल्ट, पर्स आदि) होता है, तो वह यह प्रसाद नहीं चढ़ा सकता.
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मंदिर
मंदिर के गर्भगृह में दो देवियों की मूर्तियां हैं. दाईं ओर ब्रह्माणी माता हैं, जिन्हें मीठे प्रसाद का भोग लगता है, जबकि बाईं ओर काली माता हैं, जो शराब का प्रसाद ग्रहण करती हैं. कहा जाता है कि भंवाल माता प्राचीन समय में यहां एक पेड़ के नीचे स्वयं पृथ्वी से प्रकट हुई थीं.
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डाकुओं द्वारा बनवाया गया
लगभग 800 साल पुराने इस मंदिर के निर्माण को लेकर एक दिलचस्प कहानी प्रचलित है. माना जाता है कि इसे किसी धर्मात्मा ने नहीं, बल्कि डाकुओं ने बनवाया था. एक बार राजा की फौज ने डाकुओं को घेर लिया था, तब उन्होंने माता को याद किया. मां ने चमत्कार से डाकुओं को भेड़-बकरियों में बदल दिया और उनके प्राण बच गए. कृतज्ञता के रूप में डाकुओं ने इस मंदिर का निर्माण करवाया.
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धार्मिक परंपरा
भंवाल माता मंदिर आस्था और चमत्कार का एक ऐसा केंद्र है, जो भारत की विविध धार्मिक परंपराओं की अनोखी झलक प्रस्तुत करता है.
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फोटोज
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