Navratri 2025: सितंबर 2025 में नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू होकर 30 सितंबर तक चलेगी, जो पूरे 9 दिन का त्योहार है. इस दौरान आप राजस्थान के प्रसिद्ध मंदिरों जैसे करणी माता मंदिर (बीकानेर) से लेगर केला देवी मंदिर (करौली) के दर्शन कर सकते हैं.
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Navratri 2025
नवरात्रि का पर्व देवी दुर्गा की पूजा के लिए समर्पित है. राजस्थान, अपनी समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ, देवी मां के कई प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों का घर है. नवरात्रि के दौरान इन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है, जो अपनी मुरादें पूरी करने के लिए दूर-दूर से आते हैं. आइए जानते हैं राजस्थान के 10 ऐसे ही प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में.
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केला देवी मंदिर (करौली)
पूर्वी राजस्थान में स्थित यह 1000 साल से भी पुराना मंदिर है. इसे उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में गिना जाता है. यह मंदिर अपनी मनमोहक वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है.
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करणी माता मंदिर (बीकानेर)
बीकानेर के देशनोक में स्थित इस मंदिर को 'चूहों वाली देवी' के नाम से भी जाना जाता है. यहां हजारों चूहे रहते हैं जिन्हें पवित्र माना जाता है. यह मंदिर मां दुर्गा के अवतार करणी माता को समर्पित है.
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त्रिपुरा सुंदरी मंदिर (बांसवाड़ा)
52 शक्तिपीठों में से एक यह मंदिर बांसवाड़ा के आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्थित है. यह मंदिर अपनी भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है, और यहां मां दुर्गा की पूजा की जाती है.
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जीण माता मंदिर (सीकर)
शेखावाटी क्षेत्र की तीन पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और प्राचीनता के लिए जाना जाता है. यह मंदिर सालभर भक्तों से भरा रहता है.
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तनोट माता मंदिर (जैसलमेर)
भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित यह मंदिर अपनी चमत्कारिक कहानियों के लिए प्रसिद्ध है. 1965 और 1971 के युद्ध के दौरान, कहा जाता है कि इस मंदिर को कोई नुकसान नहीं हुआ था, जिससे यह भारतीय सेना के जवानों के लिए आस्था का केंद्र बन गया.
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शाकंभरी माता मंदिर (सांभर)
जयपुर से लगभग 100 किलोमीटर दूर सांभर में स्थित यह मंदिर मां दुर्गा के साक्षात रूप को समर्पित है. यहां की मान्यता है कि देवी शाकंभरी ने अपने भक्तों को अकाल से बचाया था.
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चामुंडा माता मंदिर (जोधपुर)
यह मंदिर जोधपुर के मेहरानगढ़ किले के दक्षिणी हिस्से में स्थित है. यह मंदिर जोधपुर के शाही परिवार की कुलदेवी को समर्पित है और अपनी शानदार वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है.
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शिला माता मंदिर (जयपुर)
जयपुर के आमेर किले में स्थित यह मंदिर 15वीं शताब्दी का एक प्राचीन शक्तिपीठ है. यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक भव्यता और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है.
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ईडाणा माता मंदिर (मेवाड़)
मेवाड़ के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक यह मंदिर अपनी प्राचीनता और महत्व के लिए जाना जाता है. इस मंदिर की एक अनोखी मान्यता है कि यहां 'अग्नि स्नान' से देवी प्रसन्न होती हैं.
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अंबिका माता मंदिर (जगत, उदयपुर)
उदयपुर के पास जगत गांव में स्थित इस मंदिर को 'मेवाड़ के खजुराहो' के रूप में जाना जाता है. यह अपनी जटिल मूर्तियों और संरचनाओं के लिए प्रसिद्ध है, जो इसे स्थापत्य कला का एक अद्भुत नमूना बनाती हैं.
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