Rajasthan Tourism: अजमेर का पृथ्वीराज स्मारक, चौहान वंश के अंतिम शासक पृथ्वीराज चौहान तृतीय के सम्मान में बना है. काले पत्थर की यह भव्य घुड़सवार मूर्ति अरावली पहाड़ी पर स्थित है, जहां से अजमेर शहर का विहंगम दृश्य दिखता है.
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Prithviraj Smarak Ajmer
राजस्थान के ऐतिहासिक शहर अजमेर की पहचान यहां स्थित पृथ्वीराज स्मारक से है. यह भव्य स्मारक महान राजपूत शासक और चौहान वंश के अंतिम वीर राजा, पृथ्वीराज चौहान तृतीय, की स्मृति और सम्मान में बनवाया गया है.
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Prithviraj Smarak Ajmer
पृथ्वीराज की यह स्मारक उनकी भक्तिभाव और साहस का प्रतीक है, जिन्होंने बारहवीं शताब्दी में अजमेर और दिल्ली की दो राजधानियों पर शासन किया था.
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Prithviraj Smarak Ajmer
अजमेर नगरी की स्थापना 7वीं शताब्दी में राजा अजयपाल चौहान ने 'अजय मेरू' के नाम से की थी, और यह 12वीं सदी के अंत तक चौहान वंश का केंद्र बना रहा. यह शहर अनेक राजवंशों का शासन देख चुका है, लेकिन पृथ्वीराज चौहान की शौर्यगाथा यहां आज भी जीवंत है.
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Prithviraj Smarak Ajmer
यह स्मारक एक पहाड़ी के ऊपर स्थित है, जो चारों तरफ से अरावली श्रृंखला की हरी-भरी पहाड़ियों से घिरा हुआ है. इस स्थान से दर्शक और पर्यटक अजमेर शहर का सुहाना विहंगम दृश्य (Panoramic View) देख सकते हैं.
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Prithviraj Smarak Ajmer
स्मारक का केंद्रीय आकर्षण पृथ्वीराज चौहान तृतीय की मूर्ति है, जो काले पत्थर से निर्मित है. इस भव्य मूर्ति में उन्हें अपने घोड़े पर बैठे हुए दर्शाया गया है. घोड़े के अगले दोनों पैरों के खुर सामने ऊपर की तरफ हवा में उठे हुए हैं. इस मुद्रा को देखकर ऐसा प्रतीत होता है, जैसे घोड़ा पूरे जोश और गति के साथ आगे की तरफ बढ़ने वाला है.
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Prithviraj Smarak Ajmer
स्मारक के ठीक बगल में एक हरा भरा बग़ीचा भी है, जहां पर्यटक शांतिपूर्वक बैठ सकते हैं और अजमेर के ऐतिहासिक महत्व को महसूस करते हुए विश्राम कर सकते हैं.