Shrinathji Nathdwara: नाथद्वारा, जिसे भगवान श्रीनाथजी की नगरी के रूप में जाना जाता है, जन्माष्टमी के पावन पर्व पर अर्थात् आज के दिन यहां पर अनोखा माहौल होता है. कृष्ण जन्मोत्सव का यह दिन यहां किसी राजसी उत्सव से कम नहीं होता, जहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपने आराध्य के जन्म की खुशियां मनाने के लिए जुटते हैं.
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Nathdawara Shrinathji Mandir
यह जन्मोत्सव इस बार 16 अगस्त 2025 यानी आज शनिवार के दिन मनाया जा रहा है. इस दिन यहां पर कृष्ण भक्ति में पूरा माहौल डूबा रहता है. मंदिर को रंग बिरंगी लाइटों और फूलों से दुल्हन की तरह सजाया जाता है. हवा में गूंजते भजन और जयकारों की ध्वनि हर भक्त के मन में एक अलग ही शांति और उत्साह भर देती है.
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Nathdawara Shrinathji
जन्माष्टमी की सुबह से ही विशेष अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं. भगवान श्रीनाथजी को पंचामृत से स्नान कराया जाता है और उनका विशेष शृंगार किया जाता है. मध्यरात्रि में, जब कान्हा का जन्म होता है, तो पूरा मंदिर परिसर "नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की" के जयकारों से गूंज उठता है.
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इसी समय, एक अनूठी परंपरा के तहत, भगवान के जन्मोत्सव की खुशी में 21 तोपों की सलामी दी जाती है, जो इस उत्सव को और भी भव्य बना देती है.
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इसके बाद, श्रीनाथजी को सोने के पालने में झुलाकर लाड़ लड़ाया जाता है और भक्तों को उनके दर्शन कराए जाते हैं. इस दिन विशेष रूप से तैयार किया गया भोग भी भगवान को अर्पित किया जाता है, जिसमें माखन-मिश्री, खीर और तरह-तरह के मिष्ठान शामिल होते हैं.
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इस मंदिर में भोग और खान-पान से जुड़े कुछ सख्त नियम हैं, जिनका पालन सदियों से किया जा रहा है. श्रीनाथजी को दिन में आठ बार भोग लगाया जाता है. इन भोगों में भगवान को समय के अनुसार अलग-अलग व्यंजन अर्पित किए जाते हैं. भोग की थाली में शुद्ध और सात्विक भोजन को प्राथमिकता दी जाती है.
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यह भोजन देसी घी, दूध, माखन, दही, मेवा और विभिन्न प्रकार के अनाजों से मिलकर बनता है. श्रीनाथजी को प्रिय पारंपरिक राजस्थानी भोजन जैसे दाल-बाटी-चूरमा, कढ़ी, बाजरे की रोटी और मौसमी सब्जियां भी इसमें शामिल होती हैं.
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श्रीनाथजी को भोग लगाने और मंदिर परिसर में लाने वाले भोजन में कुछ चीजें पूरी तरह वर्जित हैं, क्योंकि उन्हें तामसिक माना जाता है और वे पूजा की पवित्रता को भंग करती हैं. भोग के लिए बनने वाले किसी भी भोजन में प्याज और लहसुन का उपयोग पूरी तरह से वर्जित है.
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इसी तरह, मंदिर परिसर में और भोग के लिए किसी भी तरह के मांसाहारी भोजन या अंडे का उपयोग सख्त मना है. किसी भी तरह के मादक पदार्थ जैसे शराब का सेवन भी यहां वर्जित है.
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यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं Zee Rajasthan इसकी पुष्टि नहीं करता हैं