Salasar Balaji Dham: राजस्थान के चुरू जिले में सालासर बालाजी मंदिर स्थति है, जो आज एक तीर्थ स्थल बन चुका है. कहानियों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण केवल पांच रुपये से बना था. जानिए इस मंदिर की अनोखी कहानी.
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सालासर बालाजी धाम ख्याति भारत के साथ पूरे विश्व में है. इस मंदिर का निर्माण कभी चढ़ावे के मात्र पांच रुपए से हुआ था. ये बात सुनने में काफी अनोखी है, जो ऐतिहासिक रूप से सच है.
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कहा जाता है कि लगभग 271 साल पहले इस मंदिर का निर्माण हुआ था. उस समय पांच रुपये की कीमत काफी ज्यादा थी. उस जमाने में यह राशि केवल धनी लोगों के पास होती थी.
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कहानियों के अनुसार, बालाजी को पांच रुपये चढ़ाए गए, जिससे मंदिर का निर्माण करवाया गया था. मंदिर बनवाने का उद्देश्य केवल भक्ति और श्रद्धा था.
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संवत 1811, श्रावण शुक्ला नवमी शनिवार के दिन बालाजी महाराज की मूर्ति की स्थापना की गई थी. फिर संत मोहनदास जी ने फतेहपुर के कारीगरों को बुलाया और मंदिर बनवाने का काम शुरू किया गया.
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सालासर बालाजी धाम निर्माण कार्य संवत 1815 में पूरा हुआ था. आज के समय में लाखों की संख्या में श्रद्धालु बालाजी महाराज के दर्शन करने आते हैं.
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कहानियों के मुताबिक, सालासर के ठाकुर और जुलियासर के ठाकुर दोनों भाई थे. जुलियासर के ठाकुर असाध्य रोग से पीड़ित थे, उन्होंने हनुमान जी से प्रार्थना की कि यदि वे ठीक हो गए तो सालासर मंदिर में अपनी पत्नी के साथ जोड़े से धोक लगाएंगे.
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वहीं, अरदास लगाने के बाद ठाकुर पूरी तरह स्वस्थ हो गए. फिर उन्होंने अपनी पत्नी के साथ सालासर मंदिर में धोक लगाई. उन्होंने पांच रुपए का चढ़ावा दिया, जिससे संत मोहनदास जी ने मंदिर का निर्माण करवाया.
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ये वहीं, ठाकुर थे, जिन्होंने शादी के बाद जोड़े से धोक लगाने की परंपरा की शुरुआत की थी, जो आज भी निभाई जा रही है. पूरे देश से नवविवाहित जोड़े सालासर बालाजी की धोक लगाने के लिए आते हैं.
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डिस्क्लेमर- ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.