Sawai Madhopur Mausam: सवाई माधोपुर में मानसून का मिजाज थमने का नाम नहीं ले रहा है. एक बार फिर मौसम ने करवट ली है और बारिश की बौछारों के साथ शहर को भिगोने की तैयारी में है. लगातार हो रही बारिश ने जहां एक ओर वातावरण को सुहाना बना दिया है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों और प्रशासन के लिए चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं.
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सड़कों पर जलभराव और यातायात में व्यवधान की स्थिति उत्पन्न हो रही है. मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक बारिश का यह सिलसिला जारी रह सकता है, जिसके चलते सभी को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
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जिले का जड़ावता गांव इन दिनों प्रकृति के प्रकोप का शिकार बन चुका है, जहां भारी बारिश और पानी के तेज बहाव ने भयावह तबाही मचा दी है. गांव के हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि लोग अपनी आंखों के सामने अपनी जिंदगी भर की कमाई से बने घर और खेत-खलिहान बर्बाद होते देख रहे हैं.
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कभी फसलों से लहलहाने वाले खेत अब 50 से 55 फीट गहरी और करीब एक किलोमीटर लंबी खाइयों में तब्दील हो चुके हैं. इन खाइयों ने एक मकान, दो दुकानों और दो मंदिरों को निगल लिया है, जबकि दो अन्य मकान खाई में गिरने की कगार पर हैं. इस प्राकृतिक आपदा ने गांव को तबाही की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है.
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जड़ावता गांव की तस्वीरें दिल दहलाने वाली हैं, जो ग्रामीणों के डर और बेबसी की कहानी बयां कर रही हैं. भारी बारिश और मिट्टी के कटाव ने गांव को तबाही के मुहाने पर ला खड़ा किया है.
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ग्रामीण अपनी ओर से पानी के बहाव को मोड़ने और कटाव को रोकने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लगातार पानी की आवक ने हालात को और बदतर कर दिया है.
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कई घरों में पानी घुस गया है, जिसके चलते लोग अपने परिवार और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं.
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ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सामान लादकर गांव छोड़ते लोगों का दृश्य किसी दर्दनाक पलायन से कम नहीं है. दूसरी ओर, राहत कार्यों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
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प्रदेश के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और प्रशासनिक अधिकारियों ने गांव का दौरा किया था, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि राहत कार्य अपर्याप्त हैं. मंत्री के दौरे के बाद प्रशासनिक अमला गायब हो गया, और अब केवल एनडीआरएफ और पुलिसकर्मी मौके पर हैं, जो इस विकट स्थिति में बेबस नजर आ रहे हैं. कोई ठोस समाधान अब तक सामने नहीं आया है.