Sawai Madhopur News: राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले का मोरल बांध बारिश के चलते फिर उफनाया है. मोरेल बांध पर फिलहाल करीब दो फिट की चादर चल रही है. सन 1981 में आई बाढ़ के दौरान इस बांध की पाल टूट गई थी, जिससे निचले इलाकों में भारी तबाही हुई थी.
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Morel dam overflowed
Sawai Madhopur News: प्रदेश भर में मानसून मेहरबान है, जिसके चलते प्रदेश के तकरीब सभी बांधों में लगातार पानी की आवक हो रही है. वहीं, कई बांध पूरी तरह से लबालब भर कर छलक भी चुके हैं. इसी कड़ी में सवाई माधोपुर और दौसा सहित जयपुर क्षेत्र में हुई भारी बारिश के चलते मोरल, ढूंढ सहित कई नदी नाले उफान पर हैं. ऐसे में सवाई माधोपुर और दौसा जिले की सीमा पर स्थित मोरेल बांध भी पूरी तरह से भर गया गया और छलक गया है.
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मोरेल बांध पर फिलहाल करीब दो फिट की चादर चल रही है. मोरेल बांध देश का ही नहीं, अपितु एशिया का सबसे बड़ा कच्चा मिट्टी का बांध है. इस बांध का निर्माण 1952 में करवाया गया था.
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सन 1981 में आई बाढ़ के दौरान इस बांध की पाल टूट गई थी, जिससे निचले इलाकों में भारी तबाही हुई थी, जिसके बाद इस बांध की पाल अर्थात सुरक्षा दीवार जो कि पूरी तरह से मिट्टी की बनी हुई है, उसका पुनरनिर्माण करवा गया था.
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मोरेल बांध से दौसा सहित सवाई माधोपुर जिले की सैंकड़ों बीघा कृषि भूमि की सिंचाई होती है. इस बांध से निकलने वाली दो प्रमुख नहरों से दौसा और सवाई माधोपुर जिले के किसानों को फसल के लिये पानी मिलता है.
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मोरल बांध क्षेत्र के लोगों के लिए सिंचाई की एक महत्वपूर्ण परियोजना है. मोरेल बांध के भरने से क्षेत्र के किसानों में जहां उत्साह है, वहीं, बांध पर चादर चलने ने बांध के निचले इलाकों में बसे गांवों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है.
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बांध में लगातार पानी की आवक बनी हुई है और बांध पर दो फिट तीन इंच की चादर चल रही है. ऐसे में दौसा एंव सवाई माधोपुर प्रशासन लगातार बांध की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं. प्रशासन द्वारा लोगों से बांध ओवरफ्लो वाली जगह से दूर रहने और ग्रामीणों से सावचेत रहने की अपील की गई है.