Shri Sanwariya Seth Dham: श्री सांवलिया सेठ धाम मेवाड़ की आस्था का केंद्र है. हर साल की तरह इस बार भी जलझूलनी एकादशी पर यहां भव्य रथयात्रा निकली, जिसमें लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा. चांदी के रथ में विराजमान ठाकुर जी और आसमान से हुई बरसात ने मानो उत्सव को दोगुना कर दिया.
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सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. ठाकुर जी के बाल स्वरूप को ओसरा पुजारी ने विधि-विधान से चांदी के रथ में विराजित किया. जैसे ही रथयात्रा शुरू हुई, जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा.
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ध्वज थामे सेवक सबसे आगे, सजे-धजे हाथियों पर पुजारी परिवार, ऊंटों पर नक्कारखाना, छह बैंड और दर्जनों ढोल-पूरा कस्बा भक्तिरस में रंग गया.
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रथयात्रा शुरू होते ही आसमान से झमाझम बारिश होने लगी लेकिन भीगते हुए भी श्रद्धालु डटे रहे. ढोल-नगाड़ों की थाप और गुलाल के बीच हर कोई नाचता-गाता रहा. भक्त मान रहे थे कि इंद्रदेव खुद ठाकुर जी का जलाभिषेक करने उतरे हैं. यह नजारा भक्तों के लिए अविस्मरणीय बन गया.
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करीब दो किलोमीटर लंबी इस यात्रा को पांच घंटे से अधिक समय लगा. राधाकृष्ण मंदिर, कुरेठा नाका, नीमचौक और कुम्हारों का मोहल्ला मंदिर की झांकियां यात्रा में शामिल होती गई. रास्तेभर गुलाल की बारिश और भक्ति गीतों से माहौल गूंजता रहा. गांव-गांव से आए बेवाण यात्रा का हिस्सा बने.
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सांवलिया सेठ की आस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां मन्नत पूरी होने पर लोग करोड़ों का चढ़ावा चढ़ाते हैं. विदेशी मुद्रा, सोना, चांदी, और यहां तक कि चांदी के ट्रैक्टर, जेसीबी, पेट्रोल पंप तक भेंट किए जाते हैं. भक्तों का कहना है कि यहां मांगी हर मन्नत पूरी होती है.
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भक्त श्रवण सिंह राव ने सांवलिया सेठ धाम को मेवाड़ का सौभाग्य बताया. उन्होंने कहा कि यह न केवल चित्तौड़ का गौरव है बल्कि भविष्य में यह स्थान संस्कृत शिक्षा, धर्म प्रचार और सेवा का वैश्विक केंद्र बनेगा.
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सांवलिया सेठ की रथयात्रा आस्था, उत्साह और भक्ति का संगम की पहचान है. लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और ठाकुर जी से अपनी मन्नतें पूरी करने की प्रार्थना करते हैं.