Sikar News: सीकर के लक्ष्मणगढ़ में दुर्गा पूजा की तैयारियां चल रही हैं, जहां यह महोत्सव 43 सालों से मनाया जा रहा है. बंगाल से आए कारीगर मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं बना रहे हैं, जिससे यह कस्बा 'मिनी बंगाल' का रूप धारण करेगा.
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सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ में दुर्गा पूजा महोत्सव की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. इस शारदीय नवरात्रि में लक्ष्मणगढ़ एक बार फिर "मिनी बंगाल" में बदल जाएगा, जहां लगभग दो दर्जन जगहों पर विशाल पंडाल सजाए जाएंगे और मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी.
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43 साल पुरानी परंपरा
लक्ष्मणगढ़ में दुर्गा पूजा महोत्सव का आयोजन पिछले 43 सालों से हो रहा है, जो इसे यहां की एक महत्वपूर्ण परंपरा बनाता है. इस महोत्सव के सफल आयोजन के लिए अलग-अलग समितियां काम कर रही हैं. कस्बे के कई प्रमुख स्थानों जैसे तोदी कुई, पोस्ट ऑफिस सीकर रोड, लालकुआं घंटाघर, मोहनवाड़ी न्यामा बाजार, और भैरव भवानी चौक पर सार्वजनिक रूप से पंडाल सजाए जा रहे हैं.
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कोलकाता के कारीगर
इस महोत्सव की सबसे खास बात है मां दुर्गा की विशाल प्रतिमाएं, जिन्हें विशेष रूप से बंगाल से आए कारीगर बनाते हैं. कारीगर दिलीप पाल ने बताया कि वह पिछले 30 सालों से लक्ष्मणगढ़ में ही दुर्गा मैया की मूर्तियां बना रहे हैं.
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भव्य प्रतिमाएं
इस साल उन्होंने 40 से अधिक मूर्तियां बनाई हैं, जो न केवल लक्ष्मणगढ़ बल्कि सीकर, झुंझुनूं, चूरू और नागौर जिलों के विभिन्न स्थानों पर स्थापित की जाएंगी.
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दिलीप पाल
दिलीप पाल ने यह भी बताया कि मूर्तियों को बनाने के लिए जरूरी मिट्टी और श्रृंगार का सारा सामान कोलकाता से मंगाया जाता है, जिससे मूर्तियों में बंगाल की पारंपरिक कला और सुंदरता झलकती है.
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भक्ति और उल्लास
नवरात्रि के दौरान, लक्ष्मणगढ़ का पूरा माहौल भक्ति और उल्लास से भर जाता है. यहां के पंडाल, रोशनी, और सांस्कृतिक कार्यक्रम बंगाल की दुर्गा पूजा की याद दिलाते हैं. यह महोत्सव स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए एक खास अनुभव होता है, जो उन्हें इस धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव का हिस्सा बनने का मौका देता है.