40 घंटे तक मौत से जंग लड़ने के लिए प्रोफेसर को इस छोटी सी चीज ने दी हिम्मत, बोले- न होती तो मैं भी न होता

Edited bySandhya YadavReported bySharad Tank
Published: Aug 26, 2025, 07:37 AM|Updated: Aug 26, 2025, 07:37 AM

Sirohi News: माउंट आबू में उदयपुर के एक प्रोफेसर ट्रैकिंग के दौरान खाई में गिरकर 40 घंटे तक मौत से जूझते रहे. घने जंगल, अंधेरे और बारिश के बीच उन्होंने कीपैड मोबाइल से परिवार और रेस्क्यू टीम से संपर्क बनाए रखा. सीआरपीएफ, पुलिस, वन विभाग, नगर पालिका आपदा दल और ग्रामीणों की मदद से असिस्टेंट कमांडेंट शिवराज सिंह के नेतृत्व में टीम ने कठिन रेस्क्यू कर उन्हें सुरक्षित निकाला. 
 

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Sirohi News: जिले के माउंट आबू से बड़ी राहत की खबर सामने आी. 40 घंटे तक मौत से जंग लड़ने के बाद उदयपुर के प्रोफेसर को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है. पहाड़, मूसलाधार बारिश,घने जंगल और अंधेरे के बीच ये सिर्फ एक हादसा नहीं… बल्कि जीवन के लिए संघर्ष और जिंदगी बचाने के लिए सीआरपीएफ, पुलिस, वन विभाग और नगर पालिका आपदा दल के द्वारा की गई मेहनत की मिसाल है.
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माउंट आबू में उदयपुर के व्याख्याता अपने साथियों के साथ ट्रैकिंग पर निकले थे लेकिन शेरगांव इलाके में रास्ता भटककर खाई में जा गिरे. घना जंगल, अंधेरा, जंगली जानवर और लगातार बरसात… इन हालात में उन्होंने पूरे 40 घंटे बिताए. ये संघर्ष किसी भी इंसान की हिम्मत तोड़ सकता था लेकिन उन्होंने उम्मीद नहीं छोड़ी.
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जीवन बचाने का सहारा बना एक छोटा कीपैड मोबाइल, उसी फोन से उन्होंने परिवार और रेस्क्यू टीम से संपर्क बनाए रखा. जंगल में नेटवर्क की हल्की सी रौशनी उनके लिए उम्मीद की किरण बनी और आखिरकार यही फोन उनकी ज़िंदगी की डोर साबित हुआ.
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दूसरी तरफ जिला प्रशासन की ओर गठित रेस्क्यू टीम ने हार नहीं मानी. सीआरपीएफ, पुलिस, वन विभाग और नगर पालिका के आपदा जवान– सबने मिलकर घंटों तक खाई और घना जंगल खंगाला. असिस्टेंट कमांडेंट शिवराज सिंह के नेतृत्व में टीम ने रस्सियों के सहारे खाई में उतरकर जान की बाज़ी लगाई और व्याख्याता तक पहुंचने में सफलता हासिल की.
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इस रेस्क्यू में ग्रामीणों का सहयोग सबसे अहम रहा. प्रशासनिक अधिकारी और जिला कलेक्टर अल्पा चौधरी खुद हालात पर नज़र बनाए हुए थीं. पूरा जिला इस संघर्ष और मेहनत का गवाह बना – जहां एक ओर इंसान ने अपना जीवन बचाने के लिए धैर्य दिखाया, वहीं दूसरी ओर सिस्टम ने जिदंगी बचाने के लिए ज़िम्मेदारी निभाई.
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आखिरकार, मौत और जिंदगी के बीच 40 घंटे का संघर्ष सफल रहा. माउंट आबू से यह सिर्फ राहत की खबर नहीं, बल्कि टीम वर्क, जज्बे और इंसानी जज़्बात की मिसाल है. जीवन जीने का संघर्ष और जीवन बचाने की मेहनत, यही इस रेस्क्यू ऑपरेशन का असली संदेश है.