Tonk Government School Roof Collapse: राजस्थान के झालावाड़ में हुए हादसे की दो महीने बाद भी प्रदेश का शिक्षा विभाग की कुंभकर्णी नींद टूट नहीं रही है. शिक्षा विभाग के अधिकारी सरकारी स्कूलों के ताला लगाकर उनको बंद करने को तो तैयार है लेकिन जीर्ण-शीर्ण स्कूलों को सुधारने के लिए कतई तैयार नहीं है.
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Tonk Government School Roof Collapse
Tonk Government School Roof Collapse: हालात यह हैं टोंक ज़िले में मंगलवार सीनियर सेकेंडरी बालिका विद्यालय में कमरे की छत भरभरा कर धराशायी हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जिस कमरे की छत गिरी है, उसी के पास में कक्षा 9 और कक्षा 10 की छात्राओं के टेस्ट पेपर लिए जा रहे थे. जैसे ही तेज धमाके के साथ छत गिरी तो छात्राएं दहशत में आ गई…वो तो ग़नीमत रही कि छत के साथ कमरे की बाहर की दीवार नहीं गिरी. अगर यह दीवार भी गिर जाती तो फिर हादसा राजस्थान में झालावाड़ से भी बड़ा होता.
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उधर हादसे की सूचना मिलते ही उपखण्ड अधिकारी उनियारा शत्रुघ्न गुर्जर, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी सुशीला करनानी मौके पर पहुंची… अन्य ब्लाक स्तरीय अधिकारी भी मौक़े पर पहुंचे और हालात का जायज़ा लिया. वहीं, जब जी मीडिया की टीम ने जब जांच पड़ताल की तो सामने आया कि राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय ही नहीं, बाहर की तरफ़ चल रहा राजकीय प्राथमिक स्कूल का भवन भी पूरी तरह से जीर्ण शीर्ण ही है. यहां भी मासूम बच्चों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है.
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बता दें कि जिला कलेक्टरों की ओर से बीते दिनों राज्य सरकार के निर्देश परक गठित की गई सर्वे की तकनीकी टीम ने स्कूल भवन के कमरों को कंडम घोषित कर दिया था. और यह भी निर्देश दिए गए थे कि बच्चों को सुरक्षित स्थान पर शिफ़्ट किया जाए लेकिन स्थानीय शिक्षा अधिकारियों ने ना तो इन भवनों को दुरुस्त करवाया, ना ही बच्चों को कहीं दूसरे सुरक्षित भवन में अब तक शिफ़्ट किया.
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हालात यह है कि ककोड क़स्बे में राजकीय प्राथमिक स्कूल, सीनियर सेकेंडरी बालिका स्कूल और सीनियर सेकेंडरी स्कूल तीनों ही भवन पूरी तरह से विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित नहीं हैं. पूरी तरह से जीर्णशीर्ण और ख़स्ता हाल में हैं. इतना ही नहीं, ककोड़ के तीन आंगनबाड़ी केंद्र भी पूरी तरह से बेहाल की स्थिति में है. एक आंगनवाड़ी केंद्र का था, बीते दिनों छज्जा टूट कर नीचे गिर गया था, जिसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता चोटिल भी हो गई थी. अब सवाल ये उठता है कि जब राज्य सरकार पूरी तरह से खस्ताहाल शिक्षा के भवनों और आंगनबाड़ी केंद्रों को लेकर संवेदनशील है और फिर टोंक ज़िले के कुछ लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी. सार्वजनिक निर्माण विभाग से लेकर शिक्षा विभाग और पंचायती राज से जुड़े विभाग के अधिकारी आख़िर क्यों लापरवाही बरत रहे हैं.
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बता दें कि ककोड में मंगलवार को सुबह 9 बजे राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय मैं एक कमरे की छत टूटकर नीचे आ गिरी बताया यह जा रहा है कि उसकी भवन के बराबर में बच्चियां अपना टेस्ट पेपर दे रही थी जैसे ही छत नीचे गिरी तेज़ हवा तेज धमाके की आवाज़ से बच्चियों में दहशत हो ग इतना ही नहीं थी शिक्षक भी इधर उधर दौड़ने लगे. ZEE मीडिया से बातचीत करते हुए कुछ बच्चियों ने अपनी पीड़ा को रखी लेकिन बग़ल में खड़े शिक्षकों के डर की वजह से ज़्यादा कुछ नहीं बोल पाए.
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वहीं उनियारा उपखंड अधिकारी शत्रुघ्न गुर्जर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि हमने पहले ही इस स्कूल के भवन में कमरो को जीर्णशीर्ण घोषित किया है और जिस कमरे की छत गिरी है उस पर पहले से ही ताला लगाया हुआ है और बाद में इसके बाहर रस्सी बांध दी गई थी. उनियारा ब्लॉक के सभी एजेंसियों ने स्कूलों के संचालकों को सरकार की ओर से यह भी निर्देश दिया गया था कि अगर ज़्यादा बारिश होती है या भवन के गिरने के अंदर ऐसा होता है कि स्कूली बच्चों की छुट्टी कर दी जाए. फ़िलहाल पूरे मामले की जांच पड़ताल कर रहे हैं.
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वहीं मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी सुशीला करवानी ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया. बातचीत करते हुए कहा कि हमने पहले ही कमरे पर ताला लगा दिया था. कुछ अन्य भवन भी हैं, जिनकी भी रिपोर्ट मँगवाई गई है. सवाल ये उठता है कि जब बीते दिनों झालावाड़ में हादसा हुआ तब राज्य सरकार ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश देकर ज़िले के स्कूलों और आंगनबाड़ी भवनों के सर्वे करवाने के निर्देश दिए थे इसके बाद टोंक ज़िले में 130 से ज़्यादा प्राथमिक और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों को जर्जर और कंडम घोषित किया गया था. इनके मरम्मत और ज़मींदोज करने की सिफ़ारिश भी की गई थी. इसी स्कूल में भी 10 कमरों में से सात कमरों को पूरी तरह से अनुपयोगी बताया गया था. इसकी रिपोर्ट भी शिक्षा विभाग और जिला कलेक्टर को भेजी गई थी.
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बावजूद इसके यहां पर 125 छात्राओं के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा था और उनकी जान जोखिम में डालकर उनके शिक्षण गतिविधियां करवाई जा रही थी अब हादसे के बाद अधिकारी फिर से कार्रवाई का राग अलाप रहे हैं लेकिन किसी भी ज़िम्मेदार अधिकारी अपनी ज़िम्मेदारी नहीं ली न ही किसी की लापरवाही साबित की ऐसे में सवाल उठना लाज़मी है कि आख़िर इस बड़ी लापरवाही पर ज़िम्मेदारी तय किसकी होगी और लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई कब होगी ?