Rajastha Quiz: जयपुर के रेनवाल क्षेत्र के नांदरी गांव में दशहरा छह महीने तक मनाया जाता है. यहां 1857 से चली आ रही परंपरा के तहत 40 फीट ऊंचे रावण का दहन बाण से नहीं, बल्कि गोली मारकर किया जाता है. नरसिंह लीला और सांस्कृतिक झांकियों के साथ यह आयोजन बेहद खास होता है.
1/7
Dussehra
देशभर में दशहरा आमतौर पर आश्विन माह की शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाया जाता है. इस दिन रावण दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है. लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर के रेनवाल क्षेत्र में स्थित नांदरी गांव की परंपरा बिल्कुल अलग है. यहां दशहरा एक दिन नहीं, बल्कि पूरे छह महीने तक मनाया जाता है.
2/7
Dussehra
यहां रावण दहन की शुरुआत आश्विन मास की षष्ठी तिथि से होती है और इसका समापन वैशाख माह की शुक्ल दशमी को किया जाता है. इस लंबे आयोजन के कारण नांदरी गांव पूरे प्रदेश में अपनी विशेष पहचान रखता है.
3/7
Dussehra
इस गांव की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां रावण दहन तीर से नहीं किया जाता. पुतले को गोली मारकर जलाया जाता है. करीब 40 फीट ऊंचे रावण के पुतले को आतिशबाजी और रंग-बिरंगे पटाखों के बीच दहन किया जाता है. ग्रामीण बताते हैं कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी उसी उत्साह के साथ निभाई जाती है.
4/7
Dussehra
ग्रामीणों के अनुसार यह परंपरा वर्ष 1857 से शुरू हुई थी. उस समय नंदसिंह शेखावत ने गांव में सीतारामजी का मंदिर बनवाया था. इसके बाद वैशाख शुक्ल दशमी को नरसिंह लीला का आयोजन होने लगा. कुछ वर्षों बाद इस आयोजन में रावण दहन भी जोड़ा गया. तब से लेकर अब तक यह परंपरा लगातार निभाई जा रही है.
5/7
Dussehra
हर साल इस मौके पर गांव में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. कलाकारों द्वारा झांकियां सजाई जाती हैं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होती हैं और हजारों की संख्या में लोग इस अद्भुत आयोजन को देखने आते हैं. खास परंपरा यह भी है कि रावण पुतले के सिर के स्थान पर रखी रंगीन पानी से भरी मटकी को गोली मारकर फोड़ने के बाद ही दहन शुरू होता है.
6/7
Dussehra
आज नांदरी गांव की यह परंपरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यहां के सांस्कृतिक गौरव की भी पहचान है. छह महीने तक चलने वाला यह अनोखा दशहरा लोगों को एक अलग अनुभव देता है और गांव को विशेष महत्व दिलाता है.
7/7
Dussehra
प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. यहां फोटो AIकी मदद से ले गई है. Zee Rajasthan इसकी पुष्टि नहीं करता है.