Rajasthan Unqiue Dishes: राजस्थान में कई पारंपरिक फूल जैसे फोग, लाल बाटे, सहजन, रोहिड़ा, कुमटिया और पीलु खाए जाते हैं. ये फूल स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. ग्रामीण रसोई में इनका उपयोग रायता, सब्ज़ी, पराठा और चटनी में किया जाता है.
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राजस्थान की रेतीली धरती न सिर्फ किलों और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां की खाद्य परंपराओं में कुछ ऐसे फूल भी शामिल हैं जो स्वाद, पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. ये फूल न केवल ग्रामीण भोजन का हिस्सा हैं, बल्कि पारंपरिक रसोई की पहचान भी हैं.
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फोग का फूल राजस्थान में विशेषकर गणगौर उत्सव के समय खाया जाता है. यह फूल गर्मियों में शरीर को शीतलता प्रदान करता है और लू से बचाने में सहायक माना जाता है. यह पीले-सफेद रंग का छोटा फूल होता है, जो झाड़ीदार फोग पौधे पर खिलता है. ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं इसे रायते में मिलाकर, बाजरे की रोटी के साथ या सूखे साग की तरह पकाकर खाती हैं. इसकी शीतल प्रकृति और पाचन में सहायक तत्व खासकर गर्मी में इसे खास बनाते .
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सहजन या सांजना का फूल राजस्थान ही नहीं, पूरे भारत में एक पोषणयुक्त खाद्य फूल के रूप में पहचाना जाता है. इसके फूल सफेद रंग के होते हैं और इनमें हल्की मीठी सुगंध होती है. यह फूल आयरन, कैल्शियम, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है. ग्रामीण इलाकों में इसे सब्ज़ी, पराठे, पकोड़े और सूप के रूप में खाया जाता है. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है और आयुर्वेद में भी इसके उपयोग के कई उल्लेख मिलते हैं.
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लाल बाटे का फूल एक ऐसा फूल है जो स्वाद में खट्टा-मीठा होता है और इससे बनी सब्जी विशेष अवसरों पर बनाई जाती है. इसे पहले छाछ में भिगोया जाता है ताकि इसकी कड़वाहट निकल जाए, फिर इसे उबालकर पकाया जाता है। यह फूल अंकुरित अवस्था में सबसे स्वादिष्ट होता है और इसे नमक, मिर्च और मसालों के साथ पकाया जाता है. इसकी खास बात यह है कि यह पाचन में हल्का होता है और स्वाद में अनोखा. राजस्थान के गांवों में यह आज भी लोकप्रिय व्यंजन माना जाता है.
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रोहिड़ा राजस्थान का राजकीय पुष्प है. इसके फूलों का सेवन कम होता है, लेकिन इसकी पत्तियां और छाल आयुर्वेदिक औषधियों में प्रयुक्त होती हैं. यह वृक्ष मुख्यतः सूजन, बुखार और त्वचा रोगों में उपयोगी होता है.
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कुमटिया नामक पौधे के बीजों को उबालकर सुखाया जाता है और फिर उससे विशेष प्रकार की सूखी सब्जी बनाई जाती है. यह विशेष रूप से बीकानेर और बाड़मेर जैसे इलाकों में प्रचलित है.
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पीलु असल में एक फल है, लेकिन इसे फूलों की तरह ही उपयोग किया जाता है. यह अंगूर के आकार का होता है और रेगिस्तानी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगता है. पीलु को कच्चा खाया जाता है और कभी-कभी अचार या मुरब्बा में भी इस्तेमाल किया जाता है.
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