Udaipur Lord Jagannath Rath Yatra 2025: दुनिया में झीलों के शहर के नाम से प्रसिद्ध उदयपुर आज भगवान जगन्नाथ की भक्ति में लीन हो गया है. जहां पर प्रभु की यात्रा 80 किलो के चांदी के रथ पर होगी.
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भक्तिभाव से सजेगा उदयपुर
आज उदयपुर नगरी एक बार फिर भक्तिभाव और उल्लास से सराबोर हो जाएगी, क्योंकि यहां भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथयात्रा निकलने जा रही है. इस पावन यात्रा में न केवल शहर के लोग बल्कि आस-पास के गांवों से भी हजारों श्रद्धालु भाग लेने आ रहे हैं.
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दोहपर 3 बजे शुरू होगी यात्रा
रथयात्रा की शुरुआत दोपहर 3 बजे होगी और खास बात ये है कि इसकी शुरुआत 21 तोपों की गूंज के साथ होगी, जो इसे राजसी ठाठ-बाट और भव्यता प्रदान करती है. भगवान जगन्नाथ को परंपरागत वस्त्रों और आभूषणों से सुसज्जित कर, एक शानदार 80 किलो चांदी से बने रथ में विराजमान कराया जाएगा. भक्तगण पारंपरिक पोशाक पहनकर—सफेद कुर्ता-पायजामा, अंगरखा, धोती और पगड़ी में सजे पूरे श्रद्धा भाव से रस्सियों से इस रथ को खींचेंगे.
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80 किलो चांदी और सोने की छत्र से सजा रथ
इस वर्ष भगवान के रथ को एक नए रूप में ढाला गया है, जिसमें पहले के 49.7 किलो चांदी में 30 किलो और चांदी जोड़कर रथ को और अधिक भव्य बनाया गया है. रथ के ऊपरी हिस्से यानी शिखर पर सोने का छत्र लगाया गया है और उसकी सजावट में हैदराबादी कारीगरी की नक्काशी देखने को मिलेगी. कलश पर सोने की परत चढ़ाई गई है, जो इस रथ को और अधिक दिव्य बना देती है.
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रथ यात्रा का मार्ग
रथयात्रा समिति के अध्यक्ष राजेंद्र श्रीमाली के अनुसार, रथयात्रा जगदीश मंदिर से शुरू होगी और पूरे शहर में घूमने के बाद वहीं लौटकर महाआरती के साथ संपन्न होगी. यात्रा के दौरान करीब 150 से अधिक सदस्य रथ को खींचने का कार्य करेंगे, जबकि हज़ारों श्रद्धालु इसमें भाग लेंगे.
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21 आकर्षक झांकियां
इस दौरान 21 आकर्षक झांकियां रथ के साथ चलेंगी, जो अलग-अलग समाजों और संगठनों द्वारा प्रस्तुत की जाएंगी. यात्रा में सैकड़ों महिलाएं सिर पर कलश लेकर मंगल गीत गाती हुई चलेंगी और परंपरागत केसरिया साड़ी में संस्कृति और श्रद्धा की सुंदर झलक देंगी. इसके साथ ही यात्रा में कोई रंग, गुलाल या आतिशबाजी नहीं होगी, ताकि धार्मिक मर्यादा और शांति बनी रहे.
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रथ के आकार और स्वागत द्वार की विशेष अपील
रथ यात्रा समिति ने जानकारी दी है कि चांदी का यह रथ 16 फीट लंबा, 8 फीट चौड़ा और 21 फीट ऊंचा होगा. अतः जो लोग यात्रा मार्ग पर स्वागत द्वार बनाना चाहते हैं, उन्हें कम से कम 21 फीट ऊंचा द्वार बनाना होगा. रथ का निर्माण अर्बुदा हैंडीक्राफ्ट के गोपाल सुथार ने किया है, जबकि चांदी का काम महेश और कमल चौहान ने बारीकी से निखारा है.
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धार्मिक धुनों से गूंजेगा शहर
रथयात्रा में 12 बैंड अपनी मधुर धुनों से माहौल को भक्तिरस से सराबोर कर देंगे. जगह-जगह से जयकारों की गूंज उठेगी और भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ेगी, जिससे शहर के कुछ हिस्सों में ट्रैफिक जाम की स्थिति भी बन सकती है.