Jagdeep Dhankhar: उपराष्ट्रपति के इस्तीफे के बाद से राजस्थान में राजनीतिक बयानों का दौर जारी है, और हो भी क्यों ना..जगदीप धनखड़ राजस्थानी जो हैं. अब मामले पर अशोक गहलोत का बयान सामने आया है.
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अप्रत्याशित इस्तीफे ने पूरे देश को चौंका दिया है. इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे 'पूरे देश के लिए चौंकाने वाला' बताया और कहा कि यह एक ऐतिहासिक घटना है, क्योंकि स्वतंत्र भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी उपराष्ट्रपति ने अपने पद से इस्तीफा दिया है. गहलोत ने सवाल उठाया कि 'स्वास्थ्य कारण' इस्तीफे की वजह नहीं हो सकती. उन्होंने कहा कि देशभर में चर्चा है कि स्वास्थ्य कारण केवल बहाना हो सकता है. ऐसा लगता है कि इसके पीछे कोई और गंभीर कारण है.
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पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि धनखड़ ने हमेशा किसानों की आवाज उठाई और ग्रामीण भारत से गहरा नाता रखा. उनका इस्तीफा राजस्थान के लोगों के लिए एक बड़ा धक्का है. वे हमेशा किसान वर्ग के प्रतिनिधि माने जाते रहे हैं. ऐसे में यह समझना मुश्किल है कि उन्होंने इस्तीफा क्यों दिया.
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इस घटनाक्रम पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर चौंकाने वाले बयान दिए हैं. गहलोत ने दावा किया कि उन्होंने 10 दिन पहले ही कहा था कि उपराष्ट्रपति दबाव में हैं. गहलोत ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा के अध्यक्ष भी दबाव में काम कर रहे हैं. यही बात मैंने कुछ दिन पहले कही थी. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जयपुर प्रवास के दौरान उपराष्ट्रपति ने स्वयं कहा था, 'मैं किसी दबाव में काम नहीं करता' लेकिन गहलोत ने इस पर तंज कसते हुए कहा, 'कहना और हकीकत में फर्क होता है.'
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पूर्व मुख्यमंत्री ने इशारों-इशारों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए. 'क्या RSS या BJP का कोई मूव इसके पीछे है? क्या कुछ छिपाया जा रहा है?' उन्होंने यह पूछते हुए संशय जताया कि कहीं इस इस्तीफे के पीछे कोई राजनीतिक रणनीति तो नहीं?
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गहलोत ने यह भी कहा कि अब तक किसी ने उपराष्ट्रपति से इस्तीफा वापस लेने की अपील नहीं की है। प्रधानमंत्री जी को आगे आना चाहिए और उनसे रिक्वेस्ट करना चाहिए. हो सकता है इस्तीफा वापसी संभव हो. उन्होंने सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि खबरें आ रही हैं कि सरकार उपराष्ट्रपति को फेयरवेल नहीं देगी. ये चौंकाने वाली बात है.अगर ऐसा है तो सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. गहलोत ने कहा कि इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं और असली वजह शायद अभी सामने नहीं आई है. हकीकत क्या है, यह तो समय आने पर ही पता चलेगा.
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफे को लेकर राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ ने कहा कि धनखड़ साहब सुबह से ही असहज लग रहे थे. उनकी तबीयत नासाज दिख रही थी. हम लोग उनके चैंबर में भी जाकर आए थे. 11.45 पर उन्होंने राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी थी. इसके बाद हरिवंश ने आसन संभाला था. थोड़ी देर बाद धनखड़ साहब चेयर पर आए थे लेकिन थोड़ी देर बाद चैंबर में वापस चले गए थे.उनके इस्तीफे से हमें गहरा धक्का लगा है. स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उन्होंने इस्तीफा दिया है.
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफे को उदयपुर से सांसद मन्नालाल रावत का बयान भी सामने आया. उन्होंने कहा कि जहां तक उनकी जानकारी है, उपराष्ट्रपति ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि विपक्ष का बयान बौखलाहट में दिया गया बयान है.
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जगदीप धनखड़ का जन्म साल 1951 में राजस्थान के झुंझुनू जिले में एक किसान परिवार में हुआ हैं. उन्होंने 1979 में राजस्थान बार में दाखिला लिया. सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न उच्च न्यायालयों में राज्य के सीनियर अधिवक्ता के रूप में अभ्यास किया, और राजस्थान उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में सेवा की.
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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का इस्तीफे को लेकर UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने त्यागपत्र दिया. उन्होंने कहा कि उनका स्वास्थ्य पिछले कई दिनों से नासाज चल रहा था. मेरी उपराष्ट्रपति भवन में भी उनसे पिछले दिनों मुलाकात हुई थी. मुझसे भी सेहत संबंधी परेशानियां उन्होंने साझा की थीं. खर्रा बोले कि देश के उपराष्ट्रपति पद की गरिमा उन्होंने बढ़ाई. राज्यसभा का उन्होंने बखूबी संचालन किया. राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में उन्होंने उच्च आदर्श स्थापित किए.