Who is IPS Ranjeeta Sharma: राजस्थान पुलिस की तेज-तर्रार और मेहनती अधिकारी रंजीता शर्मा को शुक्रवार रात जारी 64 आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची में महत्वपूर्ण पद मिला है. उन्हें जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के ईस्ट जिले में डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (डीसीपी) नियुक्त किया गया है.
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जयपुर के इस संवेदनशील इलाके में वाहन चोरी, चेन स्नैचिंग, सड़क अपराध और अन्य संगठित अपराध लंबे समय से चुनौती बने हुए हैं. पुलिस महकमे में उम्मीद जताई जा रही है कि रंजीता शर्मा का सख्त और परिणामोन्मुखी नेतृत्व इन अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगा सकता है. उनकी पोस्टिंग को अपराध नियंत्रण और जनता की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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रंजीता शर्मा हरियाणा के रेवाड़ी जिले के दाहिना गांव की बेटी हैं. उनका जन्म फरीदाबाद में हुआ था. उन्होंने गांव की पहली आईपीएस अधिकारी बनकर पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है. सिविल सेवा की तैयारी के दौरान उन्हें कई असफलताओं का सामना करना पड़ा. 2013, 2015 और 2017 में वे यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा (प्री) भी पास नहीं कर सकीं. 2014 और 2016 में इंटरव्यू तक पहुंचीं, लेकिन अंतिम चयन नहीं हो सका. लगातार पांच असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. आखिरकार 2018 में अपने छठे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की और एआईआर 130 के साथ आईपीएस बनीं. उनका यह सफर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो थोड़ी-सी नाकामी पर हार मान लेते हैं.
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आईपीएस बनने के बाद रंजीता ने हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल नेशनल पुलिस अकादमी (एसवीपीएनपीए) में प्रशिक्षण के दौरान भी कमाल दिखाया. वे अकादमी के इतिहास में "स्वॉर्ड ऑफ ऑनर" पाने वाली पहली महिला आईपीएस ट्रेनी बनीं. यह पुरस्कार प्रशिक्षण के दौरान सर्वश्रेष्ठ आउटडोर प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु को दिया जाता है, जो पहले केवल पुरुष अधिकारियों को मिलता था. रंजीता ने कुल 50 ट्रॉफियों में से 8 जीतीं. इसके अलावा 2021 में उन्होंने दीक्षांत परेड की कमान संभाली, जो अकादमी में महिला प्रशिक्षु के लिए पांचवीं बार था. उनका यह प्रदर्शन पूरे देश में चर्चा का विषय बना.
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रंजीता शर्मा का करियर शुरू में पुलिस सेवा से अलग था. उन्होंने दिल्ली के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (आईआईएमसी) से पोस्ट ग्रेजुएट किया और लगभग 9 वर्षों तक कॉर्पोरेट सेक्टर में पीआर प्रोफेशनल के रूप में काम किया. अच्छी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर उन्होंने समाज सेवा की इच्छा से सिविल सेवा की तैयारी शुरू की. कई वर्षों की कठिन मेहनत, अनुशासन और लगन से उन्होंने आईपीएस का सपना साकार किया. उनका यह सफर दिखाता है कि उम्र या बैकग्राउंड कोई बाधा नहीं होती, बस इरादा मजबूत होना चाहिए.
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रंजीता शर्मा के पति सागर राणा भी आईपीएस अधिकारी हैं. वे 2019 बैच के हैं और मूल रूप से पश्चिम बंगाल कैडर से थे, लेकिन विवाह के आधार पर राजस्थान कैडर में ट्रांसफर हो गए. दंपती अपनी सख्त कार्यशैली और प्रोफेशनल अप्रोच के लिए जाने जाते हैं. दोनों ने पुलिस सेवा में अलग-अलग पदों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. उनका यह दंपती राजस्थान पुलिस में एक मजबूत जोड़ी के रूप में उभरा है.
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जयपुर कमिश्नरेट का ईस्ट जिला अपराध के मामले में काफी संवेदनशील है. यहां वाहन चोरी, चेन स्नैचिंग, सड़क पर लूटपाट और अन्य संगठित अपराध अक्सर होते हैं. स्थानीय निवासियों और व्यापारियों के लिए ये अपराध रोजमर्रा की समस्या बने हुए हैं. रंजीता शर्मा की पोस्टिंग से उम्मीद है कि वे विशेष अभियान चलाकर इन अपराधों पर काबू पा सकेंगी. उनकी पिछली पोस्टिंग्स में सख्त कार्रवाई और टीम वर्क से परिणाम मिले हैं. पुलिस महकमे में कहा जा रहा है कि उनकी ऊर्जा और अनुभव से ईस्ट जिले में अपराध दर में कमी आएगी और जनता को सुरक्षित महसूस होगा.
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रंजीता शर्मा का जीवन संघर्ष, धैर्य और निरंतर प्रयास की मिसाल है. गांव की बेटी से आईपीएस तक का सफर, असफलताओं से लड़ना, कॉर्पोरेट छोड़कर सपना पूरा करना और प्रशिक्षण में इतिहास रचना—यह सब दिखाता है कि मजबूत इरादे से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. अब जयपुर ईस्ट में उनकी नई जिम्मेदारी न केवल अपराध नियंत्रण के लिए बल्कि लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी. राजस्थान पुलिस को ऐसी अधिकारी पर गर्व है, जो न केवल ड्यूटी पर बल्कि जीवन के हर मोड़ पर उदाहरण प्रस्तुत करती हैं.