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राजस्थान के निराश 'किसानों' की संकटमोचक बनी मोदी सरकार, जानिए कैसे

राजस्थान के किसानों के लिए पीएम नरेंद्र मोदी संकटमोचक बनते दिख रहे हैं. राज्य के कई हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि के कारण खराब हुए चमकहीन गेहूं की खरीद की अनुमति केंद्र सरकार ने दे दी है. जिसमें 10 से 70 फीसदी तक खराब हुई चमकहीन गेहूं शामिल है.

राजस्थान के निराश 'किसानों' की संकटमोचक बनी मोदी सरकार, जानिए कैसे
राज्य सरकार ने केंद्र से मापदंडो में रियायत की मांग की थी. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: राजस्थान के किसानों के लिए पीएम नरेंद्र मोदी संकटमोचक बनते दिख रहे हैं. राज्य के कई हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि के कारण खराब हुए चमकहीन गेहूं की खरीद की अनुमति केंद्र सरकार ने दे दी है. जिसमें 10 से 70 फीसदी तक खराब हुई चमकहीन गेहूं शामिल है.

बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने बांसवाड़ा जिले के लिए 10 फीसदी, चित्तौड़गढ़ और राजसमंद जिले के 50 प्रतिशत तक के अलावा झालावाड़, सवाई माधोपुर, अलवर भरतपुर व उदयपुर जिलों के 70 प्रतिशत चमकहीन गेहूं की खरीद के अनुमति दे है. जिसके बाद जिलों में स्थित खरीद केंद्रों पर अनुमति के आधार पर गेहूं की खरीद शुरू हो गई.

इस संबंध में राज्य के खाद्य सचिव मुग्धा सिन्हा ने बताया कि आपदा के तुरंत बाद राज्य सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार को तय मापदंड में रियायत देने का आग्रह किया था. भारत सरकार के मानदंडो के अनुसार चमकहीन गेहू की खरीद समर्थन मुल्य पर नहीं कर सकता है. लेकिन अब किसानों को इस बार केंद्र सरकार की रियायत का लाभ मिलेगा. जिससे प्राकृतिक आपदा के कारण होने वाली छति कम हो सकेगी.

आपको बता दें कि मई के दूसरे सप्ताह में राज्य के कई हिस्सों में प्रकृति ने जमकर कहर बरपाया था. इस दौरान बारिश और ओलावृष्टि के कारण किसानों को काफी नुकसान झेलना पड़ा.

एफसीआई के अधिकारियों ने चेतावनी के बावजूद खरीदे गए गेहूं के भंडारण की समय पर उचित व्यवस्था नहीं की, जिसके चलते तेज बारिश में सैकड़ों क्विंटल गेहूं भींगकर खराब हो गया. जिससे राज्य के सांगरिया, हनुमानगढ़, पीलीबंगा में सबसे अधिक नुकसान हुआ था. इस दौरान एफसीआई अधिकारियों ने कहा था कि गेहूं की खरीद रिकॉर्ड के मुकाबले बेहद कम रही. इस दौरान उठाव नहीं होने से नुकसान भी बढ़ा है.