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टोंक में बजरी खनन में पुलिस अधिकारी भी शामिल, ACB की जांच में हुआ खुलासा

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीपलू थाने के एसएचओ विजेंद्र सिंह गिल की भूमिका भी संदिग्ध है. एसीबी की कार्रवाई की सूचना मिलते ही विजेंद्र सिंह गिल मौके से फरार हो गए.

टोंक में बजरी खनन में पुलिस अधिकारी भी शामिल, ACB की जांच में हुआ खुलासा
फाइल फोटो

टोंक: राजस्थान में बजरी खनन और परिवहन में पुलिस की संलिप्तता का मामला सामने आया है. गुरुवार रात को टोंक की एसीबी टीम ने कार्रवाई करते हुए पीपलू थाने के कॉन्स्टेबल कैलाश सिंह सहित दो अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है. पूरे मामले में पीपलू थानाधिकारी विजेंद्र सिंह गिल फरार है.

शुक्रवार को अजमेर में एसीबी एसपी ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि टोंक में लगातार अवैध बजरी खनन और परिवहन की शिकायत मिल रही थी. शिकायत की जांच में सामने आया कि बजरी खनन और परिवहन में पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध है. मामले को गंभीरता से लेते हुए एसीबी ने टोंक के एडिशनल एसपी विजय सिंह मीणा के नेतृत्व में गुरुवार रात को कार्रवाई की और पीपलू थाना के कॉन्स्टेबल कैलाश चौधरी सहित अवैध बजरी खनन और परिवहन करने वाले दो अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया है.

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पीपलू थाने के एसएचओ विजेंद्र सिंह गिल की भूमिका भी संदिग्ध है. एसीबी की कार्रवाई की सूचना मिलते ही विजेंद्र सिंह गिल मौके से फरार हो गए. जिनके ठिकानों पर दबिश दी जा रही है. एसीबी एसपी के अनुसार पूरे मामले में टोंक के करीब आधा दर्जन से अधिक थाने शामिल हैं. जहां प्रत्येक थाने पर प्रतिदिन डेढ़ से 2 लाख रुपए मंथली के रूप में वसूले जा रहे थे. प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि पुलिसकर्मी एसएसओ विजेंद्र सिंह गिल की प्रत्येक वाहन से करीब तीन हजार रुपए वसूल रहे थे.