जयपुर: प्रदूषण से नहीं होगा अब समझौता, NGT की सख्ती के बाद तैयार हो रही रिपोर्ट

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(National Green Tribunal) की सख्ती के बाद प्रदूषण नियंत्रक विभाग जमीनी हकीकत तलाशने निकला है. 

जयपुर: प्रदूषण से नहीं होगा अब समझौता, NGT की सख्ती के बाद तैयार हो रही रिपोर्ट
प्रतीकात्मक तस्वीर

जयपुर: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(National Green Tribunal) की सख्ती के बाद प्रदूषण नियंत्रक विभाग जमीनी हकीकत तलाशने निकला है. प्रदूषण फैलाने वाली ईकाईयों का औचक निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है. इस रिपोर्ट के आधार पर ईकाईयों पर कार्रवाई होगी. सीईटीपी से जुड़े औद्योगिक क्षेत्रों की ईकाईयों का भी औचक निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार होगी. इसके लिए पांच दर्जन अधिकारियों की टीम बनाई गई हैं. पाली समेत प्रदूषित औद्योगिक क्षेत्रों का टीम दौरा करेगी. 

प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण की वास्तविक स्थिति का पता राज्य प्रदूषण नियंत्रक विभाग लगा रहा है. इसके लिए औद्योगिक ईकाईयों का औचक निरीक्षण कर उनमें उपयोग में लिए जा प्रदूषण मानकों और उपकरणों की जांच की जा रही है. ईकाईयों से निकलने वाले प्रदूषण के खतरों और वातावरण में आए बदलाव के अध्ययन की रिपोर्ट भी पांच दर्जन अधिकारियों की टीम देंगी. इसके लिए 17 श्रेणी के उद्योगों का चयन किया गया है. 

पहले चरण में टैक्सटाइल सेक्टर से जुड़े औद्योगिक क्षेत्रों और ईकाइयों पर नजर है. प्रदूषण मंडल के अधिकारियों की टीम प्रदूषण फैला रही ईकाईयों के अलावा डंपिंग यॉर्ड का भी दौरा कर रही हैं, जिन क्षेत्रों में डंपिंग यॉर्ड नहीं हैं, उनमें कचरा निस्तारण और इससे फैल रहे प्रदूषण की स्थिति का भी जायजा लिया जा रहा है. विभाग की टीमें सीईटीपी से जुड़े औद्योगिक क्षेत्रों की ईकाईयों का भी औचक निरीक्षण कर रही है. यह रिपोर्ट एनजीटी में पेश करने के साथ प्रदेश सरकार को भी भेजी जाएगी. 

रिपोर्ट के आधार पर प्रदूषण कम करने के समाधानों पर काम शुरू होगा. एनजीटी ने प्रदेश के एक दर्जन पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरण की बिगड़ती सेहत को देखते हुए नई इकाईयों को मंजूरी और पुरानी ईकाईयों के कार्य विस्तार पर पाबंदी लगार्ठ हुई है. दिल्ली में एनजीटी के सख्त रुख के बाद अधिकतर औद्योगिक ईकाईयां राजस्थान शिफ्ट होना चाह रही हैं. ऐसे में अधिकारियों की फील्ड रिपोर्ट का आकलन भावी निर्णयों में मददगार साबित हो सकता है.