&w=896&h=504&format=webp&quality=medium)
Pratapgarh News: राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के महाविद्यालयों में लगातार विद्यार्थियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन सीमित सीटें और व्याख्याताओं की कमी के कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ रहा है. हालात यह है कि कई कॉलेजों में आवेदन संख्या सीटों से कई गुना ज्यादा है, जिससे बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रवेश से वंचित रह रहे हैं. वहीं, मैथ्स विषय की ओर विद्यार्थियों का रुझान बिल्कुल नहीं दिख रहा, जिससे इस विषय की सीटें खाली पड़ी हैं.
प्रतापगढ़ के राजकीय कन्या महाविद्यालय में बीए प्रथम सेमेस्टर के लिए 1178 आवेदन आए, जबकि सीटें सिर्फ 200 थीं। बीएससी बायोलॉजी में 252 आवेदन आए और सीटें केवल 88 रहीं. इसके उलट बीएससी मैथ्स की 81 सीटों पर एक भी आवेदन नहीं आया.
अगर बात करें भचूंडला महाविद्यालय में भी यही स्थिति देखने को मिली, जहां बीए प्रथम सेमेस्टर की 200 सीटों पर 1142 आवेदन आए. इसी तरह पीपलखूंट महाविद्यालय में 200 सीटों पर 1044 आवेदन और अरनोद महाविद्यालय में 400 सीटों पर 1166 आवेदन आए. सबसे बड़ी भीड़ गवर्नमेंट पीजी कॉलेज में देखने को मिली, जहां बीए प्रथम सेमेस्टर की 1200 सीटों पर 3466 आवेदन दर्ज हुए.
बीएससी बायोलॉजी की 132 सीटों पर 845 आवेदन आए, जबकि बीकॉम की 100 सीटों पर सिर्फ 61 आवेदन पहुंचे. बीएससी मैथ्स की 88 सीटों पर 136 आवेदन तो हुए, लेकिन प्रवेश मात्र 61 विद्यार्थियों ने ही लिया.
सीटों की कमी के साथ-साथ स्टाफ की किल्लत भी जिले की शिक्षा व्यवस्था में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं. गवर्नमेंट पीजी कॉलेज में कुल 50 स्वीकृत पदों में से केवल 19 भरे हुए हैं और 3 व्याख्याता डेपुटेशन पर काम कर रहे हैं. गर्ल्स कॉलेज में 7 पदों में से 2 रिक्त हैं. भचूंडला महाविद्यालय में 7 में से 6 कार्यरत हैं, जबकि अरनोद कॉलेज में 7 में से केवल 3 व्याख्याता ही पढ़ा रहे हैं.
जिले में जहां अन्य विषयों में सीटें कम पड़ रही हैं, वहीं गणित विषय की स्थिति बिल्कुल उलट है. कन्या महाविद्यालय की 81 सीटों पर एक भी आवेदन नहीं आया. पीजी कॉलेज में भी मैथ्स की 88 सीटों पर 136 आवेदन जरूर आए थे, लेकिन केवल 61 विद्यार्थियों ने ही एडमिशन लिया. यह स्थिति स्पष्ट करती है कि जिले में विद्यार्थी गणित विषय में रुचि नहीं ले रहे हैं.
लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए कॉलेज प्रशासन की ओर से आयुक्तालय को प्रस्ताव भेजा गया है. इसमें बीए प्रथम सेमेस्टर में अतिरिक्त सेक्शन, बीएससी बायोलॉजी में एक नया सेक्शन और अरनोद कॉलेज में बीए प्रथम सेमेस्टर में अतिरिक्त सेक्शन की मांग की गई है.
जिले के शिक्षाविदों का कहना है कि यदि जल्द ही सीटें नहीं बढ़ाई गईं और व्याख्याताओं की कमी पूरी नहीं की गई, तो विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय हो सकता है. कुल मिलाकर, प्रतापगढ़ जिले में उच्च शिक्षा की स्थिति यह दर्शाती है कि छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सीमित संसाधनों, स्टाफ की कमी और विषयगत असंतुलन के चलते शिक्षा व्यवस्था लड़खड़ाती नजर आ रही है.
राजस्थान की ताज़ा ख़बरों के लिए ज़ी न्यूज़ से जुड़े रहें! यहां पढ़ें Rajasthan News और पाएं Pratapgarh News हर पल की जानकारी. राजस्थान की हर खबर सबसे पहले आपके पास, क्योंकि हम रखते हैं आपको हर पल के लिए तैयार. जुड़े रहें हमारे साथ और बने रहें अपडेटेड!