Pratapgarh News: जैन समाज की ओर से गुणानुवाद सभा का आयोजन, त्याग और तपस्या की बताई महिमा

Rajasthan News: जैन आचार्य विद्यासागर महाराज और गच्छाधिपति आचार्य दौलत सागर महाराज के देवलोक गमन पर सकल जैन समाज की ओर से गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया. इस दौरान साध्वी गुणरंजना श्री ने मौजूद लोगों को दोनों संतों के करुणा कार्यों के विषय में जानकारी दी.

Pratapgarh News: जैन समाज की ओर से गुणानुवाद सभा का आयोजन, त्याग और तपस्या की बताई महिमा

Pratapgarh News: जैन आचार्य विद्यासागर महाराज और गच्छाधिपति आचार्य दौलत सागर महाराज के देवलोक गमन पर आज सकल जैन समाज की ओर से प्रतापगढ़ के गुमानजी जैन मंदिर में गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया. साध्वी गुणरंजना श्री की निश्रा में आयोजित इस गुणानुवाद सभा में दोनों जैन संतों के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए. सकल जैन समाज के अध्यक्ष संजय वगैरिया ने सभा को संबोधित करते हुए जैन आचार्य विद्यासागर के त्याग और तपस्या की महिमा बताई. साथ ही आचार्य दौलत सागर के 103 वर्षीय जीवन में प्राणी मात्र के लिए किए गए करुणा कार्यों के विषय में जानकारी प्रदान की. 

करियर बनाने के चक्कर में कहीं कैरेक्टर तो नहीं बिगाड़ रहा
इस दौरान साध्वी गुणरंजना श्री ने कहा कि हमें आज जिन का शासन और आसन दोनों मिले हैं. दोनों संतों ने अपने जीवन में जैन धर्म के सिद्धांतों और जिनवाणी को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया. साध्वी ने कहा कि दोनों संत ब्रांडेड बनकर आए थे और ब्रांडेड बनकर गए हैं. उन्होंने अपनी नश्वर देह का त्याग किया है. व्यक्ति वस्त्र, मकान, गाड़ी इत्यादि पुराने हो जाते हैं, तो उन्हें बदल लेता है. इसी तरह महापुरुषों ने अपनी देह पुरानी हो गई, तो उसका त्याग किया है. उन्होंने जड़ और चेतन के भेद को समझ लिया था. यह शरीर जड़ है इसका त्याग उन्होंने किया. उन्होंने कहा कि आज हमें सोचना होगा कि हम कैरेक्टर बना रहे हैं या करियर बना रहे हैं. करियर बनाने के चक्कर में कहीं हमारा कैरेक्टर तो नहीं बिगाड़ रहा है. 

धर्म रूपी दौलत और विद्या का खजाना 
हमें तत्व के मर्म को समझना होगा. हम भगवान और संतों की वंदना करते हैं, क्योंकि हम उनके जैसा बनना चाहते हैं और हम उनके जैसा तभी बन सकते हैं, जब अगाध श्रद्धा हो. विद्यासागर के पास विद्या का और दौलत सागर के पास दौलत का खजाना था जो हमें देकर गए हैं. उस धर्म रूपी दौलत और विद्या को हमें अपने जीवन और आचरण में उतारना है यही उनके प्रति सच्ची विनयांजलि है. बता दें कि गुणानुवाद सभा में बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी उपस्थित थे. इस दौरान संघ के राकेश मारवाड़ी, शंखेश्वर पार्श्वनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष अशोक कंकरेचा, पोरवाल समाज के अध्यक्ष अनिल पोरवाल, पूर्व नगर परिषद सभापति कमलेश डोशी ,वर्धमान स्थानकवासी श्रावक संघ के अध्यक्ष संजय जैन, अंबालाल चंडालिया ,बाबूलाल जैन, कुंदन प्रभा डागरिया आदि ने भी अपने भावों के माध्यम से श्रद्धा सुमन अर्पित किए.

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रिपोर्टर- हितेष उपाध्याय

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