राजस्थान की राजनीति में शोक! 4 दशक तक जनजातीय समाज की आवाज बने नंदलाल मीणा का निधन

Rajasthan Politics: राजस्थान के पूर्व मंत्री और जनजातीय समाज के सशक्त नेता नंदलाल मीणा का अहमदाबाद के अस्पताल में निधन हो गया. सात बार विधायक और एक बार सांसद रहे मीणा का जीवन राजनीति और सामाजिक कार्यों को समर्पित रहा. उनका निधन राजस्थान और जनजातीय समाज के लिए बड़ी क्षति है.

राजस्थान की राजनीति में शोक! 4 दशक तक जनजातीय समाज की आवाज बने नंदलाल मीणा का निधन
Image Credit: nandlal meena death

Nandlal Meena Death: राजस्थान की राजनीति में चार दशक से अधिक समय तक सक्रिय रहे और जनजातीय समाज की सशक्त आवाज बने पूर्व मंत्री नंदलाल मीणा का अहमदाबाद के एक अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया. नंदलाल मीणा कुल सात बार विधायक और एक बार सांसद रहे. उनका जन्म 25 जनवरी 1946 को प्रतापगढ़ जिले के अंबामाता का खेड़ा गांव में हुआ था. 20 जून 1968 को उन्होंने सुमित्रा देवी से विवाह किया. परिवार भी राजनीति से गहराई से जुड़ा रहा है. उनकी पत्नी सुमित्रा देवी चित्तौड़गढ़ की जिला प्रमुख रह चुकी हैं, पुत्र हेमंत मीणा वर्तमान में राजस्थान सरकार में राजस्व मंत्री हैं, वहीं उनकी पुत्रवधु यानी हेमंत मीणा की पत्नी प्रतापगढ़ जिला प्रमुख रह चुकी हैं. निजी जीवन में वे एक पुत्र और पांच पुत्रियों के पिता थे. नंदलाल मीणा जन्म से ही कृषि से जुड़े रहे और किसान जीवनशैली में रचे-बसे रहे.

1977 में पहली बार विधायक बने

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नंदलाल मीणा का राजनीतिक सफर बेहद लंबा और बहुआयामी रहा. 1977 में वे पहली बार विधायक बने और इसके बाद कई बार जनता का विश्वास अर्जित किया. वे 1977 से 1980 तक छठी विधानसभा के सदस्य, 1980 से 1985 तक सातवीं विधानसभा के सदस्य, 1993 से 1998 तक दसवीं विधानसभा के सदस्य, 1998 से 2003 तक ग्यारहवीं विधानसभा के सदस्य, 2003 से 2008 तक बारहवीं विधानसभा के सदस्य, 2008 से 2013 तक तेरहवीं विधानसभा के सदस्य और 2013 से 2018 तक चौदहवीं विधानसभा के सदस्य रहे. इसके अलावा वे 1989 से 1991 तक सलुम्बर से नौवीं लोकसभा के सांसद भी बने.

राजनीति में कई जिम्मेदारियां निभाईं

राजनीतिक जीवन में उन्होंने कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं. 1978 से 1980 के बीच वे राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में कार्यकाल, जनजाति क्षेत्रीय विकास, भेड़ एवं ऊन, उद्योग और राजकीय उपक्रम विभाग के प्रभारी रहे. 1993 से 1998 के बीच उन्होंने नियोजन विभाग, स्टेट मोटर गैराज, जनजाति क्षेत्रीय विकास और श्रम विभाग को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में संभाला. इसके बाद 2007-08 में मंत्री पद पर रहते हुए जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग का कार्यभार संभाला और 2013 से 2018 तक पुनः मंत्री बनकर जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग का नेतृत्व किया.

कई समितियों में रही सक्रिय भूमिका
उन्होंने विधानसभा की कई समितियों में भी सक्रिय भूमिका निभाई. अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति, विशेषाधिकार समिति और संसदीय परामर्शदात्री समिति में वे सदस्य रहे. साथ ही 2004 से 2007 तक अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के सभापति भी रहे. भाजपा संगठन में भी उन्होंने कई जिम्मेदारियां निभाईं. वे भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य, जनजाति मोर्चा के सदस्य और प्रदेश उपाध्यक्ष रहे. इसके अलावा जनता पार्टी के दौर में भी वे सक्रिय रहे और 1977 से 1980 तक जनता युवा मोर्चा राजस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर रहे.

विधायक से सांसद तक का रहा सफर

नंदलाल मीणा के चुनावी करियर में जनता ने हमेशा उन पर भरोसा जताया. 2013 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने प्रतापगढ़ (अ.ज.जा.) से भाजपा प्रत्याशी के रूप में 82,452 मत प्राप्त किए और 31,938 मतों से जीत दर्ज की. 2008 में भी उन्होंने इसी सीट से 65,103 मतों से जीत हासिल की. 2003, 1998, 1993 और 1980 के चुनावों में भी वे विजयी रहे. 1977 में उन्होंने उदयपुर ग्रामीण (अ.ज.जा.) से जनता पार्टी प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीतकर विधानसभा पहुंचे. 1989 में वे सलुम्बर लोकसभा क्षेत्र से सांसद बने और 2,03,888 मत प्राप्त किए.

अच्छे खिलाड़ी भी थे मीणा
राजनीति के साथ-साथ उनका झुकाव सामाजिक कार्यों और खेलों की ओर भी रहा. वे बैडमिंटन और वॉलीबॉल के खिलाड़ी रहे. 1996 में वे जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के नेता बने. वर्ष 2005-06 में उन्हें इंटरनेशनल फ्रेंडशिप सोसायटी, नई दिल्ली की ओर से विकास रत्न सम्मान से नवाजा गया. गरीब और पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए वे हमेशा सक्रिय रहे और आदिवासी संघ के महामंत्री के रूप में भी कार्यरत रहे.

उनका स्थायी निवास अम्बामाता का खेड़ा, प्रतापगढ़ रहा
नंदलाल मीणा का जीवन समाज और राजनीति को समर्पित रहा. उन्होंने जनजातीय समाज की आवाज को राजनीति की मुख्यधारा तक पहुंचाया और अपने क्षेत्र में विकास के लिए सतत प्रयास किया. उनके निधन से राजस्थान ने एक कर्मठ जननेता और जनजातीय समाज ने अपना सशक्त प्रवक्ता खो दिया है. यह शून्य लंबे समय तक भरना कठिन होगा.

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SAGAR CHAUDHARY

SAGAR CHAUDHARY

सागर चौधरी एक अनुभवी और समर्पित सब-एडिटर हैं, जो वर्तमान में ज़ी राजस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में करीब 2 साल का अनुभव है, और इस दौरान उन्होंने तेज, सटीक और भरोसेमंद न्यूज़ कंटेंट तैयार करके अपनी एक मजबूत पहचान बनाई है. राजस्थान की हर बड़ी और छोटी खबर पर उनकी अच्छी पकड़ उन्हें एक भरोसेमंद पत्रकार बनाती है. अप्रैल 2024 से वे ज़ी न्यूज़ संस्थान का हिस्सा हैं और अपनी मेहनत व काम करने की क्षमता से लगातार टीम में योगदान दे रहे हैं. सागर चौधरी का संबंध हरियाणा के फरीदाबाद से है, जहां उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की और मीडिया क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की.