Pratapgarh News: प्रतापगढ़ जिले के धरियावद में प्रवास के दौरान संत आचार्य पुलक सागर महाराज ने खास बातचीत में समाज, शिक्षा, धर्मांतरण, और आधुनिकता जैसे विषयों पर स्पष्ट और प्रभावशाली विचार साझा किए.
&w=752&h=564&format=webp&quality=medium)
Pratapgarh News: प्रतापगढ़ जिले के धरियावद में प्रवास के दौरान संत आचार्य पुलक सागर महाराज ने खास बातचीत में समाज, शिक्षा, धर्मांतरण, और आधुनिकता जैसे विषयों पर स्पष्ट और प्रभावशाली विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि समाज में जितनी जरूरत धर्म की नहीं है, उतनी सेवा की है। लोग भूखे हैं, बेसहारा हैं, और जब उन्हें रोटी नहीं मिलती तो वे उस मज़हब की ओर चले जाते हैं, जो उन्हें सहारा देता है. उन्होंने धर्म के नाम पर हो रही राजनीति और बहस को निरर्थक बताया और कहा कि बदलाव केवल सेवा से आएगा.
धर्मांतरण आज भी क्यों जारी है इसको लेकर आचार्य ने बताया कि धर्मांतरण कोई नया संकट नहीं है, यह तब तक नहीं रुकेगा जब तक हम सेवा नहीं करेंगे. आदिवासियों या गरीब वर्ग को धर्म नहीं चाहिए, उन्हें रोटी, इलाज और शिक्षा चाहिए. ईसाई मिशनरियां सेवा के बदले मजहब देती हैं, और हम सिर्फ भाषण. जब तक हमारी नीति और नियत दोनों साफ नहीं होंगी, तब तक हम अपने लोगों को अपने साथ नहीं जोड़ पाएंगे. अगर कोई भूखा है तो उसे पहले भोजन चाहिए, राम नाम बाद में.
वहीं वर्तमान शिक्षा पद्धति में क्या सबसे बड़ी कमी है? इसको लेकर उन्होंने कहा की आज की शिक्षा केवल नौकरी पाने का साधन बन गई है, जीवन जीने की कला नहीं सिखाती. पहले गुरुकुलों में 72 कलाएं सिखाई जाती थीं. व्यवहार, संयम, संवाद और संस्कार. अब बच्चा थ्योरी तो पढ़ता है, पर रिश्तों में फेल हो रहा है. कोस थीटा, साइन थीटा तो जीवन में काम नहीं आते, लेकिन धैर्य, सहनशीलता और विनम्रता हर पल जरूरी हैं. जब तक शिक्षा जीवनमूल्यों से नहीं जुड़ती, तब तक समाज में संतुलन नहीं आएगा.
आचार्य से जब हिंदू राष्ट्र की मांग को पर पूछा गया कि आप किस नजरिए से देखते हैं? उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र का मतलब किसी धर्म का विरोध नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली की रक्षा है. जब दुनिया में मुस्लिम और ईसाई राष्ट्र हो सकते हैं, तो भारत में हिंदू राष्ट्र की मांग क्यों गलत मानी जाती है? भारत वह देश है जहां बहुसंख्यक होते हुए भी हिंदू समाज को अपनी पहचान बचाने की लड़ाई लड़नी पड़ रही है. हमें अपने मंदिर, तीर्थ, त्यौहार और मर्यादाओं को बचाना है इसके लिए एक सांस्कृतिक चेतना जरूरी है.
वहीं आज का युवा आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, आध्यात्म से दूरी क्यों? इस पर उन्होंने कहा कि आधुनिकता को अपनाना गलत नहीं है, लेकिन उसे आध्यात्म से जोड़ना जरूरी है. सोशल मीडिया, टेक्नोलॉजी और विज्ञान हमारे जीवन का हिस्सा हैं, पर अगर उसमें संयम नहीं होगा, तो वह घातक बन जाएगा. राम के समय भी रावण थे, कृष्ण के समय भी कंस बुराइयां हमेशा रहेंगी, लेकिन आध्यात्म उनमें कमी लाता है. धर्म कोई जादू नहीं, बल्कि नियंत्रण की विधा है. जब धर्म साथ होता है, तो तकनीक भी सेवा का माध्यम बनती है, न कि अहंकार का.
राजस्थान की ताज़ा ख़बरों के लिए ज़ी न्यूज़ से जुड़े रहें! यहां पढ़ें Rajasthan Newsऔर पाएं Latest Rajasthan Newsहर पल की जानकारी. राजस्थान की हर खबर सबसे पहले आपके पास, क्योंकि हम रखते हैं आपको हर पल के लिए तैयार. जुड़े रहें हमारे साथ और बने रहें अपडेटेड!