Rajasthan Foundation Day पर होगी कैदियों की समय पूर्व रिहाई, जारी हुए आदेश

राजस्थान दिवस के अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा फैसला लेते हुए समय सीमा में कैदी विशेष को सजा माफ करते हुए समय पूर्व रिहाई, राज्य परिहार दिए जाने के आदेश दिए हैं. 

Rajasthan Foundation Day पर होगी कैदियों की समय पूर्व रिहाई, जारी हुए आदेश
सीएम अशोक गहलोत.

Jaipur: राजस्थान दिवस (Rajasthan Diwas) पर प्रदेश की जेलों से बड़ी संख्या में कैदी रिहा किए जाएंगे. गृह विभाग ने जेलों से छोड़े जाने वाले कैदियों की श्रेणियों के संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं. खास बात यह है कि आजीवन कारावास और अन्य गंभीर अपराधों से दंडित कैदियों की सजा माफ की जाएगी, लेकिन उन्हें जुर्माना राशि चुकानी होगी. 

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हर साल 30 मार्च को राजस्थान स्थापना दिवस (Rajasthan Foundation Day) मनाया जाता है. इस बार राजस्थान दिवस के अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ा फैसला लेते हुए समय सीमा में कैदी विशेष को सजा माफ करते हुए समय पूर्व रिहाई, राज्य परिहार दिए जाने के आदेश दिए हैं. 

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मुख्यमंत्री की घोषणा के एक दिन बाद ही रविवार को गृह विभाग ने रिहा किए जाने वाले कैदियों की श्रेणी बताते हुए आदेश जारी किए हैं. रिहा किए जाने वाले कैदियों की सजा माफ की जाएगी, लेकिन जुर्माना राशि माफ नहीं करने के निर्देश दिए गए हैं.

मुख्य बिंदु
- आजीवन कारावास से दंडित बंदी, जिन्हें स्थाई पैरोल स्वीकृत किया जा चुका है. उनकी सजा 14 वर्ष की पूरी हो गई है, इन्हें बाकी सजा माफ कर समय पूर्व रिहा किया जाएगा
- आजीवन कारावास से नहीं बल्कि विभिन्न अवधि की सजा से दंडित बंदी, जिन्होंने दी गई दो तिहाई सजा भुगत ली है, उन्हें छोड़ा जाएगा.
- हालांकि पिछले दो साल में उन्हें जेल सजा से दंडित नहीं किया गया हो, तब ही छोड़ा जाएगा.
- घातक बीमारी जैसे कैंसर, एड्स, कोढ़ पीड़ित बंदियों, अंधे, विकलांग बंदी जो दूसरे के सहारे हो, उनकी सजा माफ कर रिहा किया जाएगा.
-   अंधे-लाचार बंदियों के लिए मेडिकल बोर्ड प्रमाण पत्र दिया जाना होगा.
- 70 साल पूरी कर चुके पुरुष बंदी, 65 साल की महिला बंदी, जिन्हें एक मात्र प्रथम अपराध में सजा से दंडित किया गया हो उन्हें रिहा किया जाएगा.
- ऐसे बंदी जो प्रतिबंधित धाराओं में दंडित हैं, उन्हें स्थाई पैरोल स्वीकृत कर दिया गया है, उन्हें समय से पूर्व रिहा नहीं किया जाएगा.
-इनके अलावा निम्नलिखित अपराधों की श्रेणी में सभी बंदियों को समय में पूर्व रिहा नहीं किया जाएगा और राज्य परिहार भी नहीं दिया जाएगा.
- जिनका अन्वेषण दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 के अधीन,  आईपीसी 1973 के तहत विभिन्न केंद्रीय अधिनियम के तहत अपराध अन्वेषण किया जा रहो.
- केंद्रीय सरकार की किसी संपत्ति का नुकसान पहुंचाने के मामले में बंद हो.
- सरकारी सेवा में रहते अपराध करने पर दोषी मानते हुए दंडित किया गया हो.
- जिन्हें किसी मजिस्ट्रेट ने जुर्माने की सजा दे दी, लेकिन जुर्माना जमा नहीं कराया तो रिहा नहीं किया जाएगा.
- जिन्हें साधारण कारावास की सजा से दंडित किया गया हो.
- जो जुर्माना नहीं भरने के कारण सजा भुगत रहे हो.
- इसी तरह नकली नोट, आर्म्स एक्ट, तेजाब हमले, मॉब लिंचिंग सहित 28 मामलों अपराधी हों, उन्हें रिहा नहीं करने के आदेश दिए हैं.