टोंक के दड़ा महोत्सव से हुई भविष्यवाणी, इस बार राजस्थान में नहीं पड़ेगा सूखा

इस खेल की मान्यता को किसान आने वाले साल में सुकाल होगा या अकाल होगा उससे जोड़कर देखते है. इस खेल के मैदान में दो दरवाजे बने हुए है.

टोंक के दड़ा महोत्सव से हुई भविष्यवाणी, इस बार राजस्थान में नहीं पड़ेगा सूखा
इस खेल को देखने के लिय लोग मकानों की छत पर चढ़कर देखते है.

पुरूषोत्तम जोशी/टोंक: राजस्थान के देवली उपखण्ड के आंवा कस्बे में मकर सक्रांति पर्व पर आंवा कस्बे मे दडे का अनोखा खेल खेला जाता है. जिसमे 12 गांव के लोग हिस्सा लेने के लिए आते है खेलने के लिए करीब 80 किलो वजन का एक फुटबाल नुमा बोरीयो के टाट से दडा बनाया जाता है. पहले राजा महाराजा के राज में सेना में भर्ती करने के लिए इस खेल को केला जाता था. 

राजा की सेना में भर्ती का था तरीका
ग्रामीणों का बताना है कि पहले राजा महाराजा के राज मे सेना मे भर्ती करने के लिए इस खेल मे जो लोंग अच्छा प्रर्दशन करते थे, उन्हे राजा अपनी फौज में सैनिक के लिए भर्ती करते थे. 

अकाल होगा या सुकाल
इस खेल को लोग वर्षों से खेलते आ रहे है. इस खेल की मान्यता को किसान आने वाले साल में सुकाल होगा या अकाल होगा उससे जोड़कर देखते है. इस खेल के मैदान में दो दरवाजे बने हुए हैं. जिनके नाम एक अखनिया दरवाजा एंव दसरे का नाम दूनी दरवाजा अगर खिलाडी दड़े को दूनी दरवाजे की तरफ धकेल कर ले जाते है. लोगों का मानना है कि इस वर्ष सुकाल होगा और किसानों की फसल की पेदावार अच्छी होगी. अगर दडे को अखनिया दरवाजे की तरफ चला जाता है तो लोगों की मान्यता है कि इस बार अकाल पड़ेगा और अगर दडा बीच मे ही रह जाता है तो लोगों की मान्यता है कि इस वर्ष मध्यम रहेगा उसी हिसाब से किसान अपनी फसल की बुआई करते हैं. 

इस खेल को देखने के लिए लोग मकानों की छत पर चढ़कर देखते है. हजारों की तादात में इस खेल को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. यह खेल 12 बजे शुरू होता है जो शुरू होकर करीब 3 बजे तक लगातार इस खेला जाता है

निर्णायक स्थित में पहुंचा दड़ा
आज आंवा में खेले गए दड़ा खेल का नतीजा प्रदेशवासियों के लिए सौगात लेकर आया. टोंक के आवां से प्रदेश में इस साल की पहली भविष्यवाणी दड़ा महोत्सव में दूनी दरवाजे पहुंचा दड़ा. दूनी दरवाजे में दड़ा पहुंचने पर सुकाल की होती है भविष्यवाणी. तो भविष्यवाणी की मानें तो इस बार प्रदेश में सूखा नहीं पड़ेगा.