अलवर: राज्यपाल के नाम सौंपा गया ज्ञापन, स्कूलों के लिए जारी गाइडलाइन का जताया विरोध

ज्ञापन में मांग की गई कि, सरकार फीस के मामले में अन्य राज्यों व विभिन्न न्यायालयों के निर्णयों के आधार पर व्याहारिक गाइडलाइन जारी करे.

अलवर: राज्यपाल के नाम सौंपा गया ज्ञापन, स्कूलों के लिए जारी गाइडलाइन का जताया विरोध
ज्ञापन में सरकार द्वारा स्कूलों के लिए जारी गाइडलाइन का विरोध जताया गया है.

जुगल गांधी/अलवर: निजी स्कूल एसोसिएशन 'स्कूल शिक्षा परिवार' अलवर द्वारा राज्यपाल के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया. स्कूल संचालकों द्वारा लॉकडाउन (Lockdown) व कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण के चलते सरकार द्वारा स्कूलों के लिए जारी गाइडलाइन का विरोध जताया है.

अलवर में जिला अध्यक्ष लोकेश मिश्रा के नेतृत्व में शुक्रवार को यह ज्ञापन दिया गया. ज्ञापन में मांग की गई कि, सरकार फीस के मामले में अन्य राज्यों व विभिन्न न्यायालयों के निर्णयों के आधार पर व्याहारिक गाइडलाइन जारी करे. साथ ही, सरकार द्वारा बार-बार फीस स्थगन के आदेश से भी अभिभावकों में भ्रम की स्थिति बन रही है. इसे दूर करे.

इसके अलावा आरटीई (RTE) में प्रवेश प्रक्रिया में भी संशोधन किया जाए. इसके अलावा अध्यापकों को वेतन दिए जाने के लिए सरकार से आर्थिक पैकेज की मांग भी की है. बता दें कि, इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने कोविड-19 की वजह से लागू लॉकडाउन की अवधि के लिए छात्रों को स्कूल फीस से छूट के लिए बच्चों के अभिभावकों की याचिका पर शुक्रवार को विचार करने से इंकार कर दिया.

शीर्ष अदालत ने कहा कि, इस राहत के लिए याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय जाना होगा. प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने वीडियो कांफ्रेन्सिग के माध्यम से मामले की सुनवाई करते हुये कहा, 'फीस बढ़ाए जाने का मामला राज्य के उच्च न्यायालयों में उठाया जाना चाहिए था. यह उच्चतम न्यायालय में क्यों आया है?'

पीठ ने कहा कि, इसे लेकर प्रत्येक राज्य और यहां तक कि प्रत्येक जिले की अलग समस्यायें हैं. दरअसल, विभिन्न राज्यों में स्कूल जाने वाले बच्चों के अभिभावकों ने शीर्ष अदालत में यह याचिका दायर कर अनुरोध किया था कि, कोविड-19 की वजह से लागू लॉकडाउन के दौरान स्कूल की फीस के भुगतान में छूट देने अथवा इसे स्थगित रखने का निर्देश दिया जाए.