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राजस्थान में धड़ल्ले से बिक रहा प्राइवेट टैंकरों में सरकारी पानी, हो रही अवैध वसूली

जलदाय विभाग के पंप हाउसों और टंकियों पर बल्क मीटर नहीं होने से धड़ल्ले से प्राइवेट टैंकरों में सरकारी पानी बिक रहा है.

राजस्थान में धड़ल्ले से बिक रहा प्राइवेट टैंकरों में सरकारी पानी, हो रही अवैध वसूली
इसके बदले ठेकेदारों को करीब 2 लाख रुपए का पेमेंट होता है.

जयपुर: पीएचईडी के पंप हाउसों और टंकियों में ना तो कोई पानी का हिसाब है और ना ही किसी भी हिसाब किताब लेने की जरूरत समझी. पानी के इस गणित में पीएचईडी विभाग ने प्राइवेट कंपनियों को ऐसा फंसा रखा है कि आम आदमी तो दूर की बात बड़े बड़े इंजीनियर्स भी इस धोखे से चकमा खा जाएं. 

जलदाय विभाग के पंप हाउसों और टंकियों पर बल्क मीटर नहीं होने से धड़ल्ले से प्राइवेट टैंकरों में सरकारी पानी बिक रहा है. जिसके बाद जयपुर में रोजाना लाखों लीटर पानी का गणित गड़बड़ा रहा है. पीएचईडी भी खुद मान रहा है कि पानी के अवैध कारोबार से पानी का गणित पूरी तरह से बिगड़ चुका है. प्राइवेट टैंकर में पानी भरने के बदले 100 से 150 रुपए की अवैध वसूली हो रही है. ज्यादातर पंप हाउसों और हाइड्रेंट पर कई सालों से लगे कर्मचारी ड्यूटी कर रहे हैं. इसके बावजूद विभाग की ओर से अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई है. सरकारी पेयजल सप्लाई से जुड़े टैंकरों पर विभाग की सूचना पट्टिका भी नहीं लगी होने से लोगों में भी कंफ्यूजन की स्थिति रहती है.

जलदाय विभाग शहर में रोजाना 1500 से 1700 टैंकर पानी की सप्लाई कर रहे हैं. इसके बदले ठेकेदारों को करीब 2 लाख रुपए का पेमेंट होता है. लेकिन ठेकेदारों की मिलीभगत के चलते सीधा प्राइवेट कंपनियों को मुनाफा दिया जा रहा है. यानि सीधे तौर पर जहां पानी पहुंचना चाहिए, वहां पानी नहीं पहुंच पा रहा है. जलदाय विभाग के अधिकारी खुद इस बात को कबूल कर रहे है कि इस तरह से पानी का हक सरेआम छीना जा रहा है. 

विभाग के एडिशनल चीफ इंजीनियर देवराज सौलंकी का कहना है कि इस तरह की शिकायतें सामने आई है, जिसके चलते प्राइवेट टैकर्स को सीधे तौर पर लाभ दिया जा रहा है. इस सबंध में संबंधित एक्सईएन को निर्देश दिए जाएंगे और जल्द ही इस पर एक्शन लिया जाएगा.

शहर में ट्रांसपोर्ट नगर, जामडोली, खो नागोरियान, पोलोविक्ट्री पंप हाउस पर खुलेआम बल्क मीटर ना लगे होने की आड़ में ठेकेदार और अधिकारी मुनाफा कमाने में लगे हुए है. ऐसे में अब सवाल ये खडे हो उठे है कि आखिर कब तक पीईएचडी विभाग लाखों लोगों की प्यास छीनता रहेगा.