जयपुर: NGT से औद्योगिक क्षेत्रों को बचाने की कवायद, 200 करोड़ के कोरपस फंड का गठन

उद्योग मंत्री ने बताया कि योजना के तहत 200 करोड़ रुपये का कोरपस फंड बनाया गया है.

जयपुर: NGT से औद्योगिक क्षेत्रों को बचाने की कवायद, 200 करोड़ के कोरपस फंड का गठन
उद्योग मंत्री ने बताया कि योजना के तहत 200 करोड़ रुपये का कोरपस फंड बनाया गया है.

जयपुर: प्रदेश में औद्योगिक ईकाईयों के प्रदूषण की समस्या सरकारी सहयोग से हल होगी. प्रदेश सरकार के उद्योग विभाग ने नई सीईटीपी और पुराने सीईटीपी की क्षमता में विस्तार के लिए 200 करोड़ रुपये के कोरपस फंड का गठन किया है. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी सीईटीपी के प्रस्तावों को अंतिम रुप देगी. नए और पुराने औद्योगिक क्षेत्रों में अधिकतम 50 करोड़ रुपये की राशि दी जा सकेगी.

राज्य सरकार ने उद्योगों के प्रदूषित जल की एकीकृत सीईटीपी और सीईटीपी उन्नयन की योजना जारी की है. उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा ने बताया है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2019-20 के बजट में उद्योगों के प्रदूषित जल के परिशोधन के लिए सीईटीपी की स्थापना और प्रोत्साहन के लिए अनुदान की योजना जारी करने की घोषणा की थी. बजट घोषणा के क्रियान्वयन में राज्य सरकार द्वारा योजना जारी करते हुए उद्योग विभाग को नोडल विभाग बनाया है.

उद्योग मंत्री ने बताया कि योजना के तहत 200 करोड़ रुपये का कोरपस फंड बनाया गया है. इस योजना में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी भी गठित की है. नई योजना की खासबात यह है कि यह योजना प्रदूषित जल को एकत्रित कर सीईटीपी प्लांट तक ले जाने और जल परिशोधन के बाद बची अंतिम गाद के निस्तारण के प्लांट लगाने का प्रावधान है. इस योजना में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज पर फोकस किया गया है. नई सीईपीटी और सीईपीटी उन्नयन की इस योजना में अधिकतम 50 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता दी जा सकेगी. योजना में प्लांट लागत की 50 प्रतिशत या अधिकतम 50 करोड़ रुपये जो भी कम हो वह राशि अनुदान के रुप में दी जाएगी.

प्रदूषण की गंभीर समस्या के चलते नेशलन ग्रीन ट्रिब्यूनल और उच्च न्यायालय के आदेशों से पाली, बालोतरा, जसोल, सांगानेर सहित कई क्षेत्रों में उद्योगों के संचालन में समस्या पैदा हो गई है. मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्टेट लेवल एप्रूवल कमेटी बनाई है, जिसमें अतिरिक्त मुख्य सचिव वित, उद्योग, पर्यावरण, एमडी रीको, सदस्य सचिव आरएसपीसीबी और समिति के सदस्य सचिव आयुक्त उद्योग को बनाया गया है.

इसी तरह से राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण नियंत्रण बोर्ड के मुख्य पर्यावरण इंजीनियर की अध्यक्षता में सात सदस्यीय टेक्निकल इवेलूएशन कमेटी गठित की गई है, जिसमें अतिरिक्त निदेशक/संयुक्त निदेशक उद्योग को सदस्य सचिव और पर्यावरण विभाग के प्रतिनिधि, जीएम रीको, संबंधित रिजनल अधिकारी राजस्थान प्रदूषण बोर्ड, जीएम डीआईसी और संबंधित यूनिट प्रमुख रीको को सदस्य बनाया गया है.