Pulwama Attack: शहीदों के नाम पर आयोजित हुआ कार्यक्रम, पीड़ित परिवार को किया गया सम्मानित

Jaipur News: शहीदों के सम्मान में 'एक शाम शहीदों के नाम' कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पुलवामा में राजस्थान के 5 जवानों के शहीद परिवारजनों को सम्मानित किया गया.

Pulwama Attack: शहीदों के नाम पर आयोजित हुआ कार्यक्रम, पीड़ित परिवार को किया गया सम्मानित
पुलवामा हमले के शहीदों के नाम पर आयोजित हुआ कार्यक्रम. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Jaipur: 14 फरवरी यह वह तारीख है जो प्यार प्रेम और इजहार के लिए जानी जाती है. 14 फरवरी का दिन Valentine Day के तौर पर मनाया जाता है, लेकिन बीते 2 साल से भारत के लिए यह किसी काले दिन से कम नहीं है. भारत के इतिहास में यह दिन एक दुखद घटना के साथ दर्ज है. दरअसल,14 फरवरी 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों ने देश के जवानों पर कायराना हमला कर दिया था. इस हमले में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे.

पुलवामा हमले (Pulwama Attack) की दूसरी बरसी पर देशवासियों ने उन जांबाज जवानों के बलिदान को याद किया किया. इसी के तहत राजस्थान के दूदू में शहीदों के सम्मान में 'एक शाम शहीदों के नाम' कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें पुलवामा में राजस्थान के 5 जवानों के शहीद परिवारजनों को सम्मानित किया गया. यहां पर उनको मेडल और मोमेंट देकर सम्मान दिया गया. 

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जानकारी के अनुसार, धौलपुर स्थित जैतपुर के वीर सपूत भागीरथ सिंह शहीद होने से दो दिन पहले ही उन्होंने फोन पर अपने पिता परसराम से बात करते हुए वादा किया था कि वह जल्द घर आने वाले हैं. इसके तीन दिन बाद ही वह घर लौटे, लेकिन तिरंगे में लिपटकर. शहीद की मां ने कहा, 'जब बच्चे पूछते हैं कि दादी मेरे पापा कब आएंगे तो हम कहते हैं कि पापा ड्यूटी पर गए हैं और जल्दी घर आएंगे, बस बच्चों को यही तसली देते हैं.' 

धौलपुर के राजाखेड़ा के रहने वाले भागीरथ पुलवामा हमले में शहीद हो गए थे. शहादत के बाद जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधियों व समाजसेवियों ने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया था. अब इस बात को 2 साल बीत गए हैं, लेकिन सभी आश्वासन खोखले साबित हुए हैं.

'किसी गजरे की खुशबू को महकता छोड़ कर आया हूं.
एक नन्हीं सी चिड़िया को चहकता छोड़ कर आया हूं.
मुझको अपनी छाती से लगा ले हे भारत मां,
मैं अपनी मां की तरसती बाहों को छोड़कर आया हूं.'

किसी सैनिक के लिए लिखी गई यह कविता रोहिताश लांबा व उसके परिवार के लिए सही साबित हुई थी. भले ही वो आज इस दुनिया मे नहीं है लेकिन पूरा गांव और देश पर को उन पर नाज है. आज गांव के नौजवान लड़के सेना भर्ती की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन शहादत के बाद में परिजनों से किए सरकार के वादे खोखले ही है साबित हो रहे हैं.

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जयपुर के शाहपुरा के शहीद रोहिताश लाम्बा के भाई जितेंद्र लाम्बा ने बताया कि घोषणा होती है लेकिन धरातल पर नहीं, 2 साल बीत गए लेकिन आज तक अनुकम्पा नियुक्ति नहीं मिली.

हमले के दो साल बाद दूसरी बरसी पर 40 सपूतों की याद में एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम में पीड़ित परिवारों को देख हर किसी की आंखें नम हो गई. देश की सशस्‍त्र सेनाओं ने सीमापार से हुए इस हमले का मुहंतोड़ जवाब तो दिया लेकिन एक शाम शहीदों के नाम कार्यक्रम में लोगों की नम आंखें बताती है कि उन जवानों की शहादत की टीस लोगों के जेहन में आज भी बरकरार है.

(इनपुट-अमित यादव)