बारां: मानवाधिकार के पैरोकारों को धिधकारता 10 साल से जंजीर में कैद यह युवक

टांजा निवासी मानसिक विक्षिप्त यह युवक एक नाले के किनारे लू के थपेड़ों के बीच जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है.

बारां: मानवाधिकार के पैरोकारों को धिधकारता 10 साल से जंजीर में कैद यह युवक
युवक के पिता ने सरकार से मदद की गुहार की है. (फाइल फोटो)

बारां/राम प्रसाद मेहता: जिले में 47 डिग्री के तापमान में जहां कूलर भी फेल हो गए हैं. हर कोई गर्मी से राहत पाने के लिए जतन कर रहा है. लेकिन शाहाबाद क्षेत्र के टांडा गांव में एक 35 वर्षीय युवक 10 साल से जंजीर में बंधा हुआ है. 

टांजा निवासी मानसिक विक्षिप्त युवक एक नाले किनारे लू के थपेड़ों के बीच जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है. जंजीरों में बंधा युवक मानवाधिकार की दुहाई देने वाले कथित सामाजिक कार्यकर्ताओं पर भी सवाल खड़ा कर रहा है. मानसिक विक्षिप्त युवक का नाम हरपाल कुशवाह है.

मीडिया से बातचीत में युवक के पिता कंपू कुशवाह ने बताया कि 12 साल पहले उनके बेटे का मानसिक संतुलन बिगड़ गया. जिसके बाद एमपी के ग्वालियर अस्पताल में उसका उपचार कराया गया. दोबारा तबीयत बिगड़ने के बाद प्रदेश के जोधपुर और जयपुर के अस्पतालों में उसे लंबे समय तक भर्ती रखा गया. लेकिन आर्थिक तंगी के कारण अब उसके परिवार के लोग उसका इलाज कराने में सक्षम नहीं हैं. 

परिजनों ने यह भी बताया कि हरपाल ने कई बार अपने परिवार के लोग और ग्रामीणों पर हमला बोल हमला कर दिया. जिस कारण उसे गांव के पास लोहे की जंजीर से एक पेड़ में बांध कर रखा गया है.

लेकिन अब तक कोई भी सामाजिक संस्था इस युवक के इलाज के लिए मदद करने को सामने नहीं आई है. वृद्ध पिता ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन से अपने बेटे का इलाज कराने के लिए मदद की गुहार लगाई है.