खाजूवाला: बारिश ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, मंडी में रखी फसल हुई खराब

खाजूवाला क्षेत्र में अचानक हुई तेज बारिश ने किसानों की मेहनत को पानी मे बहा दिया. धान मंडी में खरीद के लिए आई फसल खराब हो गई. 

खाजूवाला: बारिश ने किसानों की मेहनत पर फेरा पानी, मंडी में रखी फसल हुई खराब
किसानों के मुताबिक इस बर्बादी के लिए मंडी प्रशासन की लापरवाही जिम्मेदार है

खाजूवाला: बीकानेर के खाजूवाला में अचानक हुई बारिश ने अन्नदाता की मेहनत पानी फेर दिया है. मंडी में खुली पड़ी किसानो की फसल पानी से भीगी तो किसानों ने मंडी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया. लेकिन अपने खून पसीने की मेहनत से उगाए फसल को पानी में बहता देख किसान खून के आंसू रो रहा है. हम बात कर रहे है उस अन्नदाता की जिसकी मेहनत से तैयार फसल प्रशासन की लापरवाही से उसकी आंखों के सामने बह गई. 

खाजूवाला क्षेत्र में अचानक हुई तेज बारिश ने किसानों की मेहनत को पानी मे बहा दिया. धान मंडी में खरीद के लिए आई फसल खराब हो गई. क्षेत्र में अचानक आई तेज बारिश ने पूरी धानमण्डी में अफरा-तफरा मच गई. खुले में पड़ी किसानों की सरसों, चना तथा गेहूं की फसल को ढ़कने का काम शुरू हुआ. किसानों को जो भी सामान फसल ढ़कने के लिए मिला, किसानों ने फसल को ढ़कने का काम तेजी से किया. लेकिन आधा घंटा तेज हुई बरसात ने फसलों को पूरी तरह से भिगो दिया किसानों द्वारा किया कोई भी किया जतन काम नहीं आया. अपनी खुली आंखों के सामने अपनी फसल बहती देखते रहे. 

मंडी में सरसों, चना तथा गेहूं की बम्पर आवक के चलते शैडों के अलावा सड़कों पर खुले आसमान के नीचे किसानों की फसल पड़ी थी, जो सबसे ज्यादा भीगी. मण्डी में जगह-जगह लगे फसलों के ढ़ेर जिसमें सरसों तेज बरसात के कारण बह गई और किसान अपनी फसल को इक्कठी करते देखे गए. किसानों की फसल भीगने पर, किसान काफी परेशान हुए.

किसानों की इस बर्बादी में मंडी प्रशासन की लापरवाही भी पूरी तरह से जिम्मेदार है किसानों ने बताया कि नई धानमण्डी में पानी निकासी न होने के कारण चारो ओर पानी ही पानी जमा हो गया. कहीं से भी पानी निकासी न होने के कारण किसानों की फसल भीग गई. मण्डी में पानी निकासी न होने तथा जिन्सों से भरे कट्टों के नीचे जमा पानी को निकालने के लिए गेट के नीचे की दीवार को तोड़ कर पानी निकाला गया. अगर नई धान मण्डी में सही तरीके से पानी निकासी होती तो बरसात तो शायद किसानों की फसल ऐसे ही ना बहती.

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या किसानों की फसलों के प्रति बरती मंडी प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा सरकार किसानों को देगी या जांच का विषय कह कर किसानों को खून के आंसू रुलायेगी ये देखना वाली बात होगी.