राजस्थान में 20 साल बाद दोहराया ससुर-दामाद का संयोग, पर इस बार पार्टी बदली

राजस्थान में कांग्रेस के दो प्रत्याशियों ने 20 साल बाद यहां एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया है.

राजस्थान में 20 साल बाद दोहराया ससुर-दामाद का संयोग, पर इस बार पार्टी बदली
राजस्थान में कांग्रेस ने 99 सीटें जीतीं (PIC: Lalchand Kataria/Facebook)

नई दिल्ली:  राजस्‍थान विधानसभा चुनाव (Rajasthan elections 2018) में कांग्रेस ने बड़ी जीत हासिल की है. कांग्रेस ने राजस्थान में सत्तारूढ़ भाजपा को करारी शिकस्त दी है. यहां कांग्रेस ने 199 में से  99 सीटों पर जीत के साथ बहुमत के जादुई आंकड़े के लगभग पास पहुंच गई है और सरकार बनाने की तैयारी में है. वहीं पार्टी की हार के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपना इस्तीफा मंगलवार रात (11 दिसंबर) राज्यपाल कल्याण सिंह को सौंप दिया है. 

राजस्थान में कांग्रेस के दो प्रत्याशियों ने यहां एक अनोखा रिकॉर्ड बनाया है. दरअसल, राजस्थान में कांग्रेस की टिकट पर ससुर और दामाद दोनों ने जीत हासिल की है. इससे पहले यह रिकॉर्ड राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत और उनके दामाद ने बनाया था. 

झोटवाड़ा विधानसभा सीट से कांग्रेस के प्रत्याशी लालचंद कटारिया ने जीत हासिल की है. उन्हें यहां से 127185 वोट मिले. वहीं, भाजपा के प्रत्याशी राजपाल सिंह शेखावत को इस सीट से 116438 वोट मिले. लालचंद कटारिया ने झोटवाड़ा सीट से 10747 वोटों से जीत हासिल की है. वहीं, उनके दामाद विजयपाल मिर्धा ने डेगाना सीट से जीत हासिल की है. उन्होंने भाजपा प्रत्याशी अजय सिंह किलक को 21323 वोटों से हराया है

20 साल पहले भैंरो सिंह शेखावत और उनके दामाद ने भी भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की थी. 1998 में उनके दामाद नरपत सिंह राजवी ने भी चुनाव जीता था. 

बना अजब संयोग
डेगाना सीट पर विजयपाल के पिता लगातार दो बार से हार रहे थे. इस बार उन्होंने भाजपा प्रत्याशी अजय सिंह किलक को हराते हुए अपने पिता की हार का भी बदला लिया है. इस सीट पर पिता और पुत्र के बीच एक अजीब संयोग भी बना है. दरअसल, विजयपाल मिर्धा के पिता रिछपालसिंह मिर्धा 34 साल की उम्र में 1990 में डेगाना सीट से राजनीति में उतरे थे. इस दौरान उन्होंने अजय सिंह किलक के पिता रामरघुनाथ चौधरी को हराया था.

Vijaypal Mirdha

कांग्रेस ने जीती 99 सीट
बता दें कि राज्य की 200 में से 199 सीटों पर मतदान हुआ था. देर रात तक घोषित परिणामों के अनुसार कांग्रेस ने 99 सीटें जीती हैं. भाजपा को 73 सीटों पर जीत मिली है. बसपा छह, माकपा दो सीटों पर जीती है. 12 सीटों पर निर्दलीय व छह पर अन्य विजयी रहे हैं. एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए है.

बैठक के बाद होगा मुख्यमंत्री पर फैसला
कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने बताया कि पार्टी विधायक दल की बैठक बुधवार सुबह 11 बजे प्रदेश मुख्यालय में होगी. इसमें विधायकों की राय ली जाएगी और पार्टी आलाकमान को अवगत कराया जाएगा. इसके बाद शाम को पुन: बैठक होगी, जिसमें मुख्यमंत्री का नाम तय हो सकता है. पार्टी के पर्यवेक्षक के सी वेणुगोपाल यहां पहुंच गए हैं.

वसुंधरा राजे ने मानी हार
चुनाव में पार्टी की हार के बाद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे रात लगभग सवा आठ बजे राजभवन में राज्यपाल कल्याण सिंह से मिलीं और अपना इस्तीफा उन्हें सौंप दिया. बाद में जारी एक बयान में वसुंधरा ने कांग्रेस को जीत की बधाई देते हुए कहा, ‘जनादेश सर आंखों पर.’ जहां तक परिणाम की बात है तो कांग्रेस के सचिन पायलट सहित सभी प्रमुख नेता चुनाव जीते हैं हालांकि झालरापाटन पर मानवेंद्र सिंह हार गए. यहां से मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे लगातार पांचवीं बार जीतीं. इसी तरह कांग्रेस के वरिष्ठ जाट नेता व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी नोखा सीट पर हार गए.

Vasundhara Raje

वसुंधरा राजे के कई कद्दावर नेता हारे
जहां तक भाजपा का सवाल है तो मुख्यमंत्री राजे के साथ उनके गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया, चिकित्सा मंत्री कालीचरण सर्राफ, पंचायत राज मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ व उच्च शिक्षा मंत्री किरण महेश्वरी जीत गए हैं, लेकिन वसुंधरा राजे सरकार में कद्दावर रहे कई मंत्री विधानसभा चुनाव हार गए हैं. इनमें परिवहन मंत्री युनूस खान, खान मंत्री सुरेंद्र पाल सिंह टीटी, यूडीएच मंत्री श्रीचंद कृपलानी, जल संसाधन मंत्री डा रामप्रताप, गोपाल मंत्री ओटाराम देवासी, कृषि मंत्री प्रभु लाल सैनी, सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक व खान मंत्री सुरेंद्र पाल सिंह टीटी, सामाजिक न्याय व आधिकारिता मंत्री अरूण चतुर्वेदी हैं.

एक सीट का चुनाव स्थगित
राज्य की 200 सीटों की विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 101 का है. फिलहाल 199 सीटों पर चुनाव हुआ है जबकि बसपा प्रत्याशी के निधन के चलते रामगढ़ सीट पर चुनाव स्थगित कर दिया गया है.

(आईएएनएस इनपुट के साथ)