राजस्थान: आयकर विभाग का बड़ा एक्शन, ओम ग्रुप के 100 करोड़ की 16 बेनामी संपत्तियां अटैच

आयकर विभाग की अन्वेषण शाखा ने इस वर्ष जनवरी माह में ओम ग्रुप के प्रतिष्ठानों पर सर्च की कार्रवाई की थी. इस ग्रुप के साथ ही श्रीराम ग्रुप और आर. के. सिसोदिया के परिसरों को भी सर्च किया गया था. 

राजस्थान: आयकर विभाग का बड़ा एक्शन, ओम ग्रुप के 100 करोड़ की 16 बेनामी संपत्तियां अटैच

जयपुर: आयकर विभाग की बेनामी विंग लगातार बड़े एक्शन ले रही हैं. आयकर छापों से बरामद बेनामी संपत्तियों को सीज करने के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं. बुधवार को बड़े एक्शन में दिल्ली हाईवे पर कूकस और खोरामीणा गांवों में 15 बेनामी संपत्तियों को और एक बेनामी बैंक खाते को अटैच किया गया. ओम ग्रुप पर छापे के दौरान इस संपत्ति का खुलासा हुआ था. छापे में मिले दस्तावेजों से सारा कच्चा चिठ्ठा खुला. ग्रुप संचालकों की आर्थिक लिहाज से कमजोर रामसिंह मीणा के नाम से 100 करोड़ रुपए मूल्य की बेनामी संपत्तियां खरीद गई थी. यहां तक की रामसिंह मीणा अपनी आयकर रिटर्न तक नहीं भरते हैं. जांच के बाद बेनामी विंग ने इस पूरे काले कारोबार की परतें खोल कर रख दी. 

15 संपत्तियां अटैच
आयकर विभाग राजस्थान की बेनामी निषेध यूनिट ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए जयपुर-दिल्ली हाईवे पर कूकस और खोरामीणा गांवों में 15 बेनामी संपत्तियों को एवं एक बेनामी बैंक खाते को बेनामी संपत्ति संव्यवहार निषेध अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत प्रोविजनल रूप से अटैच कर दिया है. इन अटैचमेंट्स के द्वारा इन गांवों में कुल करीब साढ़े दस हेक्टेयर बेनामी जमीन अटैच की गई है. इन जमीनों का बाजार मूल्य करीब 100 करोड़ रूपए बताया जा रहा है. 

आयकर विभाग की अन्वेषण शाखा ने इस वर्ष जनवरी माह में ओम ग्रुप के प्रतिष्ठानों पर सर्च की कार्रवाई की थी. इस ग्रुप के साथ ही श्रीराम ग्रुप और आर. के. सिसोदिया के परिसरों को भी सर्च किया गया था. सर्च के दौरान जब्त किए गए सबूतों से यह जानकारी मिली कि ओम ग्रुप के संचालक ओमप्रकाश अग्रवाल ने सवाई माधोपुर के मैनपुरा निवासी रामसिंह मीणा के नाम से बेनामी संपत्तियों को खरीदा. इस दौरान जयपुर – दिल्ली हाईवे पर काफी जमीनें खरीदी गई हैं. रामसिंह मीणा की आर्थिक स्थिति इतना बड़ा निवेश करने की नहीं थी. इसलिए यह मामला जांच के लिए बेनामी निषेध यूनिट को सौंपा गया. 

आयकर रिटर्न भी दाखिल नहीं
बेनामी निषेध यूनिट की जांच में यह सामने आया कि ओमप्रकाश अग्रवाल के द्वारा इन जमीनों को खरीदने के लिए रामसिंह मीणा के नाम से सरदार पटेल मार्ग स्थित कोटक महिंद्रा बैंक में एक खाता खुलवाया गया. फिर इस खाते में नगद जमा करवा कर या अपने ग्रुप की अन्य कंपनियों से लोन की एंट्रीज लेकर इन जमीनों को खरीदने के लिए भुगतान किए गए. रामसिंह मीणा के नाम से कुल 15 जमीनें खरीदी गईं. 

रामसिंह मीणा के नाम से ये जमीनें खरीदने के लिए उनकी तरफ से सभी विक्रय पत्रों पर ओमप्रकाश अग्रवाल के एक रिश्तेदार व विश्वासपात्र राजेश काबरा ने हस्ताक्षर किए. इसके लिए ओमप्रकाश अग्रवाल ने रामसिंह मीणा से राजेश काबरा के नाम पर पॉवर ऑफ अटॉर्नी भी दिलवा रखी थी. राजेश काबरा ही रामसिंह मीणा के नाम से सरदार पटेल मार्ग स्थित कोटक महिंद्रा बैंक में खोले गए खाते का संचालन करते थे. 

एग्रीमेंट का खुला खेल 
रामसिंह मीणा के नाम से खरीदी गई जमीनों में कुछ जमीनें वहीं पाई गई जो आर. के. सिसोदिया ने रामजीलाल मीणा के बेनामी नाम से पूर्व में खरीदी थीं. इन जमीनों के सम्बन्ध में आर. के. सिसोदिया का ओम ग्रुप के साथ अग्रीमेंट हुआ था जिसके तहत ये जमीनें ओम ग्रुप के ओमप्रकाश अग्रवाल ने रामसिंह मीणा के बेनामी नाम से खरीदीं और सभी विक्रय पत्रों पर आर. के. सिसोदिया ने बतौर गवाह हस्ताक्षर किए. इनमे से कुछ जमीनों का जयपुर विकास प्राधिकरण से रामसिंह मीणा के नाम से रूपांतरण भी करवाया गया.