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चुनावी शपथपत्र में खुद को बताया था साक्षर, लेकिन शपथ भी नहीं पढ़ पाईं 2 विधायक

विधानसभा में दो विधायकों ने सबको किया हैरान, लिखी हुई शपथ भी नहीं पढ़ पाईं इन्दिरा और गंगा, जबकि चुनावी शपथ पत्र में खुद को बताया साक्षर

चुनावी शपथपत्र में खुद को बताया था साक्षर, लेकिन शपथ भी नहीं पढ़ पाईं 2 विधायक

जयपुर: राजस्‍थान विधानसभा में मंगलवार को शपथ ग्रहण का कार्यक्रम हुआ. विधानसभा में नवनिर्वाचित विधायकों को सदस्यता की शपथ दिलाई गई. लेकिन इस दौरान जो नजारा दिखा वह हैरान कर देना वाला था. राजस्थान की 15वीं विधानसभा के पहले सत्र के पहले दिन 198 विधायकों की शपथ के बीच दो विधायकों ने जो किया वह सबको हैरान कर देने वाला था. मेड़ता से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी की विधायक इंदिरा देवी जैसे ही शपथ के पोडियम पर पहुंचीं तो उन्होंने आसन पर मौजूद गुलाब चंद कटारिया की तरफ देखा.

मेड़ता विधायक खुद पढ़ नहीं सकती थीं लिहाजा आसन पर मौजूद प्रोटेम स्पीकर गुलाबचंद कटारिया ने उनके लिए शपथ बोली और इंदिरा देवी ने शपथ का दोहराव करते हुए अपनी सदस्यता को मुकम्मल किया. हालांकि खुद पढ़ कर शपथ नहीं ले पाने के बावजूद इंदिरा देवी ने सदन में मौजूद लोगों को तब एक बार फिर हैरान कर दिया, जब अंगूठा लगाने की बजाय उन्होंने अपने दस्तखत किए.

अगला नाम दूसरी बार विधानसभा पहुंची बगरू विधायक गंगा देवी का था. गंगा देवी ने भी नामांकन दाखिल करते वक्त चुनावी शपथ पत्र में अपने आप को साक्षर बताया, लेकिन जब वह शपथ लेने पहुंची तो उनके लिए भी काला अक्षर भैंस बराबर ही था. गंगा देवी ने भी आसन से दरख्वास्त की तो प्रोटेम स्पीकर गुलाबचंद कटारिया ने उनके लिए भी शपथ बोली और उसका दोहराव करके गंगा देवी शपथ कार्यक्रम की इतिश्री की.

हालांकि खास बात यह भी कि शपथ के लिए प्रोटेम स्पीकर की मदद लेने वाली दोनों ही विधायक पढ़े-लिखे नेताओं को हराकर सदन में पहुंची हैं.  पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार सरपंच और जिला परिषद सदस्यों के साथ ही पंचायत समिति के सदस्यों के चुनाव में भी शैक्षणिक योग्यता लागू कर चुकी थी. पंचायती राज चुनाव में शैक्षणिक योग्यता को लेकर तब भी सवाल उठे थे और अब इन विधायकों की की निरक्षरता को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

पिछली विधानसभा में भी बयाना के विधायक बच्चू सिंह बंशीवाल ऐसे विधायक थे जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते थे. हालांकि उन्होंने भी चुनावी शपथ पत्र में अपने आप को आठवीं कक्षा तक पढ़ा लिखा बताया था, लेकिन उनकी असलियत का खुलासा भी विधानसभा में शपथ ग्रहण कार्यक्रम के दौरान ही हुआ था. पिछली बार जब प्रेम सिंह बाजोर ने आसन की मदद के बिना अपनी शपथ खुद ही पढ़ दी. तब आसन पर मौजूद घनश्याम तिवाड़ी और तत्कालीन संसदीय कार्यमंत्री राजेंद्र राठौड़ ने भी हैरानी जताई थी. इससे पहले बाजौर को भी शपथ के लिए मदद लेनी पड़ती थी.