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राजस्थान: निष्कासित नेताओं पर कांग्रेस का यू-टर्न, 40 बागियों को किया पार्टी में शामिल

कांग्रेस जिन नेताओं का विधानसभा चुनाव के दौरान 6 साल के लिए निष्कासन किया गया था, उनमें एक दर्जन पूर्व विधायक और मंत्री भी शामिल थे.

राजस्थान: निष्कासित नेताओं पर कांग्रेस का यू-टर्न, 40 बागियों को किया पार्टी में शामिल
जयपुर में राहुल गांधी ने ऐसे 12 विधायकों को कांग्रेस के साथ जोड़ा था.

जयपुर: राजस्थान लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने उन सभी बागी नेताओं को पार्टी में फिर से शामिल कर रही है जिन्हें विधानसभा चुनाव में बगावत के चलते पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था. विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 70 से अधिक पार्टी नेताओं को बागी मानकर 6 साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था. लेकिन लोकसभा चुनाव जीतने की मजबूरी के चलते अनुशासन का यह डंडा 4 महीने भी नहीं चल पाया है.

इसे कांग्रेस पार्टी की मजबूरी कहें या फिर या कुछ और कि विधानसभा चुनाव के दौरान जिन नेताओं को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने और बगावत कर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले नेताओं को आला नेताओं की सिफारिश पर 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया गया था. अब उन्हीं नेताओं की घर वापसी हो रही है. दरअसल महज तीन माह बाद ही बागियों का 6 साल का निष्कासन रद्द कर उनका फिर से कांग्रेस में स्वागत किया जा रहा है.

हालांकि जिन नेताओं का विधानसभा चुनाव के दौरान 6 साल के लिए निष्कासन किया गया था, उनमें एक दर्जन पूर्व विधायक और मंत्री भी शामिल थे. इन पूर्व विधायकों और पूर्व मंत्रियों में से अधिकांश चुनाव जीत गए है लेकिन चुनाव जीते नेता तो पार्टी में शामिल नहीं हो पाए, वो अब पार्टी एसोसिएट सदस्य बन गए हैं. जयपुर में राहुल गांधी ने ऐसे 12 विधायकों को कांग्रेस के साथ जोड़ा था. 

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मंच पर नजर आने के साथ ही कांग्रेस के लोकसभा प्रत्याशियों के पक्ष में भी लगातार प्रचार करते नजर आते हैं. वहीं जो बागी चुनाव नहीं जीत पाए उनकी भी अब घर वापसी हो रही है. पार्टी के प्रदेश संगठन महामंत्री आला नेताओं की सिफारिश पर ही बागी नेताओं के निष्कासन रद्द करने के आदेश जारी कर रहे हैं. बताया जाता है पार्टी ने विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश भर में तकरीबन 70 से ज्यादा बागियों को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने और निर्दलीय चुनाव लड़ने पर 6 साल के लिए निष्कासित किया था, लेकिन अब तीन माह बाद ही 40 से ज्यादा से बागियों का निष्कासन रद्द कर उन्हें फिर से पार्टी में शामिल किया जा रहा है। 

पार्टी ने जिन नेताओं का 6 साल का निष्कासन रद्द कर उन्हें फिर से पार्टी में शामिल किया है, उनमें केशोरायपाटन से पूर्व विधायक सीएल प्रेमी, किशनगढ़ से पूर्व विधायक नाथूराम सिनोदिया, महुआ से पूर्व जिला प्रमुख जीत सिंह, बस्सी प्रधान गणेश नारायण शर्मा, ब्लॉक सुरेन्द्र सिंह राजावत, जयपुर जिला परिषद सदस्य बेनीप्रसाद कटारिया, रामस्वरूप मीना,भीमराज भाटी, वीरेंद्र झाला, प्रकाश महावर सुधीर शर्मा का निष्कासन रद्द किया गया है.

इसके अलावा विधानसभा चुनाव में पार्टी से बगावत करने के मामले में 6 साल से पार्टी के निष्कासित किए गए नेताओं में एक दर्जन नेता ऐसे हैं जो निर्दलीय चुनाव लड़कर विधायक बन चुके हैं. इनमें बाबू लाल नागर, संयम लोढ़ा, महादेव सिंह खंडेला, लक्ष्मण मीणा, आलोक बेनीवाल, राजकुमार गौड़, रामकेश मीणा, रमिला खंडिया, बलजीत यादव, कांति मीणा शामिल हैं.

प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अविनाश पांडे का कहना है कि बागी नेताओं ने विधानसभा चुनाव में जो कदम उठाया था पार्टी ने उसके खिलाफ एक्शन लिया था लेकिन अब यह चुनाव देश का चुनाव है देश को बचाने का चुनाव है. लिहाजा जितने भी समान विचारधारा के लोग हैं उन्हें साथ रखना उन्हें जोड़े रखना बेहद जरूरी है. इसमें कहीं कोई दो राय नहीं है कि इन सभी नेताओं का अपने-अपने क्षेत्र में खासा प्रभाव है लेकिन फिर पार्टी के उस अनुशासन के डंडे का क्या जो पार्टी की रीति नीति को चलाने के लिए बेहद जरूरी है. ऐसे अगर चुनाव के समीकरणों के हिसाब से पार्टी के खिलाफ काम करने वाले नेताओं को पार्टी में शामिल किया जाता रहा तो आने वाले दिनों में कांग्रेस पार्टी में अनुशासन नाम की कोई चीज नहीं रह जाएगी.